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विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह – टेस्ट के बेस्ट कप्तान हैं धोनी

विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह – टेस्ट के बेस्ट कप्तान हैं धोनी

टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज वाक़ई नंबर वन बन चुके हैं. हर मामले में वे नए रिकॉर्ड बनाते हुए पुराने रिकॉर्डधारियों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं. आज भी वे न केवल टेस्ट के  बेस्ट कप्तान हैं, बल्कि विज्ञापन की दुनिया में भी उन पर बड़ा दाव लग रहा है. सच तो यह है कि विज्ञापनों से कमाई करने के  मामले में भी धोनी ने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़कर नंबर वन का ताज हासिल कर लिया है.

 page15जब कोई खिलाड़ी अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैच में जीरो पर आउट हो जाए, तो उसकी मन:स्थिति को समझा जा सकता है. देखा गया है कि ऐसे खिलाड़ी को न केवल चयनकर्ता भुला देता है, बल्कि इसके बाद वह खिलाड़ी किसी प्रशिक्षण केंद्र में छोटे बच्चों को क्रिकेट के गुर सिखाकर अपनी ज़िंदगी बिता देता है. मगर महेंद्र सिंह धोनी के मामले में इसका बिल्कुल उल्टा ही हुआ. वे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के पहले मैच में जीरो पर आउट ज़रूर हुए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो अपना आत्मविश्वास खोया और न ही अपनी मेहनत में कमी आने दी, बल्कि मेहनत और लगन उनकी और ब़ढ गई. आज यही धोनी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं और टीम इंडिया को ट्‌वेंटी-ट्‌वेंटी और एक दिवसीय प्रारूप का विश्व कप जिता चुके हैं. पिछले दिनों भारत खेलने आई ऑस्ट्रेलिया की टीम को उनकी टीम ने 4-0 से धोया है. दरअसल, इसी जीत के साथ वे बतौर कप्तान सबसे ज़्यादा टेस्ट मैच जीतने वाले भारत के  पहले खिलाड़ी बन गए हैं. आश्चर्य की बात तो यह है कि वे विज्ञापन की दुनिया में आज सचिन से भी बड़े ब्रांड बन गए हैं.

लोकप्रियता के मामले में भी धोनी टॉप पर हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी कप्तानी वाले 47 टेस्टों में 24 में जीत दर्ज कर पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के 49 टेस्ट में 21 जीत के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया है. हालांकि विदेशों में जीत दर्ज करने के मामले में धोनी अभी गांगुली से पीछे हैं. गांगुली की कप्तानी में भारत ने 28 में से 11 टेस्ट जीते हैं, जबकि धोनी ने 19 में से महज़ 5 टेस्ट जीते हैं. अब यदि विदेशों में टीम इंडिया को जिताने के मामले में अभी धोनी को और मेहनत करनी पड़ेगी. वैसे, इसमें कोई दो राय नहीं कि विदेशों में जीत के मामले को छोड़ दें, तो फिलहाल यही कहा जाएगा कि धोनी नंबर वन कप्तान हैं. समर्थक तो खैर उनके अपने हैं ही, अब आलोचकों ने भी उनका गुणगान शुरू कर दिया है. धोनी आज भी अपनी ज़िद पर क़ायम रहने के कारण सफल हैं. उनके लिए टीम का जीतना बहुत ज़रूरी है और इसके लिए वह सीनियरों की आलोचना करना और उन्हें टीम से बाहर करने की जुर्रत बड़े आराम से कर लेते हैं. भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने यह साबित कर दिया कि वे ठानें, तो कुछ भी कर सकते हैं. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और फिर इंग्लैंड के  हाथों घरेलू सीरीज में मिली हार के  बाद कहा जा रहा था कि कप्तान के रूप में उनके दिन अब लद चुके हैं, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे कुछ मौक़ों पर चूके ज़रूर हैं, लेकिन चुके नहीं हैं. उन्होंने राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, हरभजन सिंह, ज़हीर खान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के  बिना ऑस्ट्रेलिया को करारी हार दी है. आश्चर्य की बात तो यह है कि उन्होंने इन दिग्गज खिलाड़ियों की ग़ैर मौजूदगी में अपनी टीम बना भी दी और टीम भी ऐसी कि जिस पर शुरू में सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन उन सवालों के  जवाब लोगों को ऐसे मिले कि धोनी की आलोचना करने वाले अब उनके लिए स्वागत गीत गा रहे हैं. जिस तरह सौरभ गांगुली ने नए युवा क्रिकेटरों हरभजन सिंह, युवराज सिंह और अन्य को मा़ैका दिया था, उसी तर्ज़ पर धोनी ने. रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, मुरली विजय जैसे खिलाड़ियों के बारे में कहा जा रहा था कि ये धोनी की वजह से टीम में बने हुए हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार चार टेस्ट जिताने में इन खिलाड़ियों का योगदान किसी से छुपा नहीं है.

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धोनी ने यह साबित कर दिया कि वे टीम को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए केवल सीनियर खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहते, क्योंकि वे साधारण खिलाड़ी को विशेष खिलाड़ी बनाने की क्षमता रखते हैं. उनकी कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हराकर वह कारनामा कर दिखाया, जो कि 81 साल पुराना टेस्ट इतिहास भी नहीं कर पाया था. यह केवल भारतीय टीम की ही जीत नहीं है, बल्कि क्रिकेट जगत की बड़ी घटनाओं में से एक है.

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में नंबर एक का ताज हासिल कर चुकी है. पहले उन्होंने टी-ट्‌वेंटी विश्व कप और एक दिवसीय मैचों के विश्व कप में भारत को जीत दिलाई. और उसके बाद टेस्ट और वनडे में भी भारत को नंबर एक तक पहुंचाया. सूझबूझ भरी कप्तानी, मैदान पर शांत रवैया और किसी भी तरह का जोखिम लेने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले कप्तान धोनी युवाओं में एक आदर्श के रूप में देखे जाते हैं. अपने पसंदीदा अभिनेता जॉन अब्राहम की तरह उन्हें भी तेज़ रफ्तार बाइक और कारों का शा़ैक है. उनके पास इस समय 30 बाइक हैं, जिनमें हार्ले डेविडसन और हेलकेट जैसी लग्जरी बाइक भी शामिल हैं. आज भी जब कभी उन्हें खाली समय मिलता है, तो वे अपनी पसंदीदा बाइक पर रांची के चक्कर लगाते हैं. उन्हें जॉन अब्राहम की तरह का़फी लंबे बाल रखने का शौक़ था. उनके ये लंबे बाल ऐसा फैशन स्टाइल बने कि युवाओं ने इसे अपना लिया और उनका मैच देख रहे पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने कहा कि धोनी इन लंबे बालों को मत कटवाना.

उल्लेखनीय है कि रांची के  डीएवी जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से पढ़ाई पूरी करने के  साथ धोनी ने खेलों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. उन्हें पहले फुटबॉल का बहुत शौक़ था और वे अपनी फुटबॉल टीम के  गोलकीपर थे. ज़िला स्तर पर खेलते हुए उनके  कोच ने उन्हें क्रिकेट खेलने की सलाह दी. यह सलाह उनके लिए इतनी फायदेमंद साबित हुई कि आज वे भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे कामयाब कप्तान बन चुके हैं. शुरू में वे अपने क्रिकेट से ज़्यादा अपनी विकेट कीपिंग के  लिए सराहे जाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने बल्ले से भी कमाल दिखाना शुरू कर दिया और एक विस्फोटक बल्लेबाज़ के रूप में उभरकर सामने आए. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में उन्होंने वनडे स्टाइल में दोहरा शतक (224 रन) बनाकर जता दिया था कि वे टीम की ज़रूरतों के  हिसाब से किसी भी तरह खेल सकते हैं.

दसवीं कक्षा से ही क्रिकेट खेलने वाले धोनी बिहार अंडर 19 टीम में भी खेल चुके हैं. 1998-1999 के  दौरान कूच बिहार ट्रॉफी से धोनी को पहली बार पहचान मिली. इस टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मैचों में 488 रन बनाए और सात स्टम्पिंग भी की. इसी प्रदर्शन के बाद उन्हें साल 2000 में पहली बार रणजी में खेलने का मौक़ा मिला. 18 साल के धोनी ने बिहार की टीम से रणजी में पदार्पण किया. रणजी में खेलते हुए 2003-04 में उन्हें जिम्बाब्वे और केन्या दौरे के  लिए भारतीय ए टीम में चुना गया. जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 7 कैच और 4 स्टम्पिंग की. इस दौरे पर उन्होंने 7 मैचों में 362 रन भी बनाए. इस विदेशी दौरे पर उनकी कामयाबी को देखते हुए तत्कालीन क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी. साल 2004 में धोनी को पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम में जगह मिली. हालांकि वे अपने पहले मैच में कोई खास प्रभाव नहीं डाल सके और जीरो के स्कोर पर रन आउट हो गए. हालांकि इसके बाद धोनी को कई अहम मुक़ाबलों में मौक़ा दिया गया, मगर वे बल्ले से कोई कमाल नहीं दिखा पाए. लेकिन इसके अगले ही साल यानी 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने 123 गेंदों पर 148 रनों की ऐसी तूफानी पारी खेली कि सभी इस खिलाड़ी के मुरीद बन गए और इसके कुछ ही दिनों बाद श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने ऐसा करिश्मा किया कि विश्व के सभी विस्फोटक बल्लेबाज़ों को अपनी गद्दी हिलती नज़र आई. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए 183 रनों की मैराथन पारी खेली, जो किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज़ का अब तक का सर्वाधिक निजी स्कोर रहा है. इस मैच के बाद से धोनी को सिक्सर किंग के नाम से जाना जाने लगा और छक्का मारकर मैच जीतना उनका स्टाइल बन गया.

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2007 में भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप में बुरी तरह से हार गई थी. ऐसे में टी-ट्‌वेंटी की बागडोर धोनी के हाथों में दे दी गई. धोनी की सूझबूझ ने भारत को टी-ट्‌वेंटी का चैंपियन बना दिया. इसके बाद तो जैसे टीम इंडिया में धोनी कप्तान धोनी बन गए. क्रिकेट के  तीनों प्रारूपों में उन्होंने भारत को विश्व में नंबर एक के पायदान पर ला खड़ा किया. कहते हैं कि धोनी अगर मिट्टी को भी हाथ लगा दें, तो वह सोना बन जाती है और ऐसा इसलिए, क्योंकि वे जिस खिलाड़ी पर भी भरोसा करते हैं, वह हमेशा सफल होता है, फिर चाहे टी-ट्‌वेंटी के विश्व कप में अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा से डलवाना हो या फिर क्रिकेट विश्व कप में फार्म से बाहर रहे युवराज सिंह को मौका देना या क्रिकेट विश्व कप 2011 के  फाइनल में ़खुद फार्म से बाहर होने के  बावजूद नंबर तीन पर उतरना, धोनी का हर फैसला कामयाब साबित हुआ है. उन्होंने आईपीएल में भी अपनी कप्तानी वाली चेन्नई सुपरकिंग्स को दो बार विजेता बनवाया है. अपने फैसलों की वजह से मैदान पर वे सबसे चहेते क्रिकेटर बन चुके हैं.

हमेशा विज्ञापनों में छाए रहने वाले धोनी अपनी निजी ज़िंदगी में कैमरे से दूर रहते हैं और इसका एक उदाहरण उनकी शादी भी है. ग़ौरतलब है कि धोनी के खेल की जितनी प्रशंसा हुई है, उतनी ही उनकी आलोचना भी हुई है. कई लोग मानते हैं कि कप्तान बनने के  बाद पह आक्रामक नहीं रहे, साथ ही उनकी विकेटकीपिंग पर भी कई बार सवाल खड़े हुए हैं. उन पर अपने चहेते साथी खिलाड़ियों को ज़्यादा से ज़्यादा मौके देने का भी आरोप लगता रहा है. मैदान पर बेहद शांत रहने वाले धोनी इस मामले में भी शांत रहते हैं और अपनी आलोचनाओं का जवाब अपने प्रदर्शन से देते हैं. एक ऐसा भी समय था, जब क्रिकेट प्रेमियों ने ग़ुस्से में आकर महेंद्र सिंह धोनी का घर तोड़ दिया था और धोनी ने कहा था कि जिन लोगों ने मेरा घर तोड़ा है, एक दिन वे ही इस घर को बनाएंगे भी, और दरअसल, हुआ भी यही. उम्मीद है कि आने वाले सालों में धोनी और भी कामयाबियों को छुएंगे और देश का नाम यूं ही रोशन करते रहेंगे.

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रिकॉर्ड में धोनी सबसे आगे

सिर्फ कमाई के  मामले में ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड के मामलों में भी महेंद्र सिंह धोनी ने सचिन समेत अन्य दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में भारत की पहली पारी में 224 रन बनाकर कप्तान के रूप में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर का नया भारतीय रिकॉर्ड बनाया है. इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के  नाम था. सचिन ने बतौर कप्तान 1999 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहमदाबाद में 217 रन बनाए थे. भारत के केवल चार खिलाड़ी ही अब तक कप्तान रहते हुए दोहरा शतक बना पाए हैं. इनमें मसूंर अली खान पटौदी (203) और सुनील गवास्कर (204) शामिल हैं. इसके अलावा, धोनी ने भारतीय विकेटकीपर के सर्वोच्च स्कोर का भी नया रिकॉर्ड क़ायम किया है.

तेंदुलकर को पीछे छोड़ा…

ज्ञापन की दुनिया में भी धोनी नंबर वन बने हुए हैं. विज्ञापनों से होने वाली कमाई के  मामले में उन्होंने सचिन तेंदुलकर को भी पीछे छोड़ दिया है. उनकी विज्ञापन से कमाई का आंकड़ा 100 करोड़ को पार कर गया है, जो कि सचिन तेंदुलकर की कमाई से क़रीब 40 फीसद ज़्यादा है. फिलहाल वे 22 कंपनियों के  ब्रांड एंबेसडर हैं, जबकि सचिन केवल 17 उत्पादों की ऐड करते हैं. ऐड वर्ल्ड के जानकारों की मानें, तो धोनी की सालाना कमाई क़रीब 110 करोड़ रुपये है. हर कंपनी से उनका सालाना क़रार 6-10 करोड़ रुपये का होता है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करने के  बाद कई कंपनियां फिर से धोनी से विज्ञापन क़रार करना चाहती हैं. इसके  लिए कंपनियां 50-100 फीसद ज़्यादा रक़म देने के लिए भी तैयार हैं. फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक़, धोनी ने अक्टूबर 2011 से सितंबर 2012 के बीच 135.16 करोड़ रुपये की कमाई की. यह कमाई किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए सबसे अधिक है. कैप्टन कूल नाम से मशहूर महेंद्र सिंह धोनी को जहां 35 लाख डॉलर (क़रीब 19 करोड़ 47 लाख रुपये) क्रिकेट खेलकर मिले, वहीं प्रचार करके उन्होंने दो करोड़ 30 लाख डॉलर (127 करोड़ रुपये से अधिक) की कमाई की. सचिन तेंदुलकर कमाई के  मामले में धोनी से पीछे हैं. सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय खिला़िडयों की सूची में धोनी 31वें नंबर पर हैं. उनकी विज्ञापन से कमाई लोकप्रिय फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी से भी अधिक है. इसके  अलावा, वे खुद का व्यवसाय भी कर रहे हैं. पूरे भारत में उनकी स्पोर्ट्स फिट नाम से जिम की कई शाखाएं हैं और सच तो यह है कि उनके  नाम का परफ्यूम भी बाज़ार में बिक रहा है. फोर्ब्स के  मुताबिक़, सचिन ने एक साल में एक करोड़ 86 लाख डॉलर (103 करोड़ रुपये) की कमाई की. तेंदुलकर को क्रिकेट जहां 21 लाख डॉलर (11 करोड़ 68 लाख रुपये) मिले, वहीं प्रचार के  ज़रिए उन्होंने एक करोड़ 65 लाख डॉलर (लगभग 92 करोड़ रुपये) की कमाई की. तेंदुलकर कई बड़ी कंपनियों के  ऐड करते हैं. धोनी ने साल 2010 में रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के  साथ तीन सालों के  लिए 210 करोड़ रुपये का क़रार किया था, जो कि भारतीय क्रिकेट जगत में किसी क्रिकेटर द्वारा किया गया अब तक का सबसे महंगा क़रार है. इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने तीन सालों के  लिए 180 करोड़ रुपये का क़रार किया था. भारत का शायद ही ऐसा कोई कप्तान होगा, जिसकी कमाई और लोकप्रियता इतनी ज़्यादा रही होगी.

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