fbpx
Now Reading:
चेतश्वर पुजारा : टीम इंडिया की नई दीवार
Full Article 7 minutes read

चेतश्वर पुजारा : टीम इंडिया की नई दीवार

भारत की दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रव़िड के संन्यास लेने के पहले ही उनके विकल्प की तलाश शुरू हो गई थी. किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि यह तलाश बहुत जल्द और लंबे समय के लिए थम जाएगी. इसका सारा श्रेय चेतेश्‍वर पुजारा को जाता है, जो अपने बेहतरीन और तकनीकी रूप से सुदृढ़ खेल की बदौलत भारतीय टेस्ट टीम में नई दीवार के रूप में स्थापित हो गए हैं. कैसे हुआ यह संभव, पढ़िए चौथी दुनिया के इस विश्‍लेषण में…

जब राहुल द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था, तब क्रिकेट प्रेमियों से लेकर क्रिकेट समीक्षकों के ज़ेहन में यह सवाल उठ रहा था कि द्रविड़ के जाने के बाद भारतीय टीम में उत्पन्न हुए बड़े शून्य को कौन भरेगा? जवाब राजकोट की रन मशीन चेतेश्‍वर पुजारा के रूप में लोगों के सामने आया. तक़रीबन दो दशक तक राहुल द्रव़िड टीम इंडिया के भरोसे की दीवार बने रहे. नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करने वाले वह विश्‍व के सबसे सफलतम खिलाड़ी थे. सच तो यह है कि उन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन की मदद से न केवल शून्य के सवाल को अर्थहीन साबित कर दिया, बल्कि ख़ुद को टीम इंडिया की एक नई और मज़बूत दीवार के रूप में स्थापित भी कर लिया. बेहतरीन तकनीक और टेम्प्रामेंट के साथ बल्लेबाज़ी करने वाले पुजारा भले ही द्रविड़ की शैली के बल्लेबाज़ नहीं हैं, लेकिन टीम इंडिया की यह नई दीवार समय के साथ और मज़बूत हो रही है. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चल रही घरेलू सीरीज में अपने छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा दोहरा शतक (204) लगाकर उन्होंने इसे साबित कर दिया है. उनका हालिया दोहरा शतक इस बात का प्रमाण है कि वह लंबी रेस के घोड़े हैं. वह लंबे समय तक भारतीय टीम में खेलते नज़र आएंगे. अपनी द्विशतकीय पारी के दौरान वह सबसे कम टेस्ट मैचों में 1000 रन पूरे करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. टेस्ट मैचों में सबसे तेज़ एक हज़ार टेस्ट रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड विनोद कांबली के नाम दर्ज है, जिन्होंने 14 टेस्ट पारियों में यह मुक़ाम हासिल किया था. पुजारा पिच पर अपने पांव जमाने में थोड़ा व़क्त ज़रूर लेते हैं, लेकिन एक बार उनके पैर पिच पर जम जाएं, तो वह अपना विकेट आसानी से नहीं खोते हैं. और दरअसल, इसीलिए उन्हें भी राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की तरह टेस्ट मैच स्पेशलिस्ट माना जाता है. वर्ष 2010 से टेस्ट में पदार्पण करने के बावजूद उन्हें एक दिवसीय टीम में जगह पाने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है. हाल ही में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ संपन्न हुई एक दिवसीय सीरीज में उन्हें भी शामिल किया गया था, लेकिन वह अंतिम ग्यारह में अंतत: जगह बनाने में सफल नहीं हो सके. वह अभी भी अपने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर के आग़ाज़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

हक़ीक़त यही है कि कई साल तक घरेलू क्रिकेट में की गई उनकी मेहनत और प्रदर्शन का फल मिला. 2010 में ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे के दौरान पुजारा को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह दी गई थी. अपने पदार्पण टेस्ट मैच की दूसरी पारी में नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 72 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी. इस पारी से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे थे. आईपीएल के चौथे संस्करण के दौरान उनके घुटने में चोट लग गई, इसी वजह से कई महीने तक उन्हें क्रिकेट से दूर ही रहना पड़ा. चोट से उबरने के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शानदार वापसी की. नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने हैदराबाद में न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 159 रन बनाए.

आईपीएल के चौथे संस्करण के दौरान उनके घुटने में चोट लग गई, इसी वजह से कई महीने तक उन्हें क्रिकेट से दूर ही रहना पड़ा. चोट से उबरने के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शानदार वापसी की. नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने हैदराबाद में न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 159 रन बनाए. यह उनका पहला टेस्ट शतक था. पुजारा के लिए यह सीरीज बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इस टेस्ट सीरीज से पहले द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे दिग्गजों ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था.

यह उनका पहला टेस्ट शतक था. पुजारा के लिए यह सीरीज बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि इस टेस्ट सीरीज से पहले द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे दिग्गजों ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था. इसके बाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज में उन्होंने लगातार दो टेस्ट मैचों में दोहरा शतक और शतक लगाकर भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह पुख्ता कर ली. जिस तरी़के और कंसिसटेंसी से उन्होंने रन बनाए हैं, इससे चयनकर्ताओं की लंबे समय तक राहुल द्रविड़ के विकल्प की तलाश थम गई है. घरेलू क्रिकेट में पुजारा को रन मशीन कहा जाता है. घरेलू क्रिकेट में उन्होंने 76 मैचों में 58.96 की औसत से 6067 रन बनाए हैं. पुजारा 2008-09 के रणजी सीजन में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे.

2012-13 के रणजी सीजन में भी उन्होंने अपने बेहतरीन खेल की मदद से सौराष्ट्र को पहली बार रणजी फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया. उन्होंने क्वार्टर फाइनल में 352 रनों की शानदार पारी खेली थी. इसके पहले 2008 में उन्होंने एक महीने के अंदर तीन तिहरे शतक बनाने का अनोखा रिकॉर्ड भी बनाया था. 386 और 322 रनों की पारी उन्होंने एक अंडर-22 टूर्नामेंट में खेली थी, जबकि 302 रन उन्होंने रणजी ट्रॉफी में उड़ीसा के ख़िलाफ़ बनाए थे. पुजारा शुरू से ही लंबी पारी खेलने वाले क्रिकेटर के रूप में जाने जाते हैं. अंडर-14 से लेकर इंडिया ए के लिए खेलते हुए वह लगभग सभी टीमों के लिए तिहरे शतक लगा चुके हैं. उनकी लंबी पारी खेल सकने की क्षमता उन्हें एक बेहतरीन टेस्ट खिलाड़ी बनाती है. ग़ौरतलब है कि क्रिकेट पुजारा के ख़ून में है. उनके पिता अरविंद पुजारा टेस्ट क्रिकेटर रह चुके हैं. उनके चाचा बिपिन पुजारा भी सौराष्ट्र के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं. इससे ज़ाहिर होता है कि क्रिकेट उनके लिए किसी जुनून से कम नहीं है. वह 2006 के अंडर-19 विश्‍वकप में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. उन्होंने 6 पारियों में 117 की औसत से 349 रन बनाए थे, जिनमें तीन अर्धशतक और एक शतकीय पारी शामिल थी. सौराष्ट्र के लिए लगातार खेली गई उनकी बेहतरीन पारियां उन्हें इंडिया ए तक और उसके  बाद टेस्ट टीम के दरवाज़े तक ले गईं. यहां भी उनका बेहतरीन प्रदर्शन जारी है.

पुजारा ने अब तक जिन मैचों में शतक या अर्धशतक लगाया है, भारतीय टीम उनमें विजयी रही है. उन्होंने अपने करियर के अधिकांश टेस्ट मैच घरेलू ज़मीन पर ही खेले हैं. उन्हें भारतीय टीम की तरह घरेलू शेर कहा जा सकता है. उनकी असली परीक्षा तो विदेश की तेज़ उछाल भरी पिचों पर होगी. जिन उछाल भरी पिचों पर खेलने में द्रविड़ को महारथ हासिल थी. अब तक उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर दो टेस्ट मैच खेले हैं और तीन पारियों में 10.30 की औसत से कुल 31 रन बनाए हैं. वह शॉटपिच गेंदों का सचिन और द्रविड़ की तरह सहजता से सामना कर पाते हैं. त़ेज गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ उनकी तकनीक और टेम्प्रामेंट देखकर तो यह आशा की जा सकती है कि वह विदेशी धरती पर भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Input your search keywords and press Enter.