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फुटबॉल भी बनेगा ग्लैमरस
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फुटबॉल भी बनेगा ग्लैमरस

football-17भारत में खेलों की एक नई क्रांति आई है. भारत के युवाओं के बीच क्रिकेट की तरह फुटबॉल लोकप्रियता भी बढ़ती जा रही है. चाहे ईपीएल हो, स्पैनिश लीग हो या फिर इंडियन सुपर लीग हो. भारतीय युवा उसे देखने के लिए किक्रेट की तरह समय जरूर निकाल रहा है. भारत में फुटबॉल बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इंडियन प्रीमियम लीग(क्रिकेट) की तर्ज पर इंडियन सुपर लीग(आईएसएल) की शुरुआत की गई, जिसमें आठ टीमें एथलेटिको-डि-कोलकाता, चेन्नईयन एफसी, दिल्ली डायनमोज़, एफसी गोवा, केरला ब्लास्टर्स, मुंबई सिटी एफसी, नॉर्थ-ईस्ट यूनाइटेड एफसी और एफसी पुणे शामिल हैं. क्रिकेट, बॉलीवुड और व्यावसायिक जगत की कई बड़ी हस्तियों के जुड़े होने के कारण इस लीग के साथ फुटबॉल का भी खूब प्रचार होता है. आईसीएल की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कहा जा सकता है कि फुटबॉल भारत का दूसरा क्रिकेट बन सकता है.

पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और एथलेटिको-डि-कोलकाता के सह मालिक सौरव गांगुली का कहना है कि भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) को बीसीसीआई से सीख लेनी चाहिए. फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक खुशखबरी यह है कि 2017 में भारत फीफा अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी कर रहा है. इसमें विश्व की 24 टीमें भारत में खेलती दिखाई देंगी. भारत के पास फुटबॉल की तरफ युवाओं को आकर्षित करने का यह सबसे बड़ा मौका है. यह एक ऐसा अवसर है जो नौजवानों के अंदर फुटबॉल के लिए एक नया जोश -नया उत्साह भर देगा. इस मेजबानी का एक फायदा तो है ही कि हमारे यहां इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा.

खेल के लिए जो आवश्यक सुविधाएं हैं उस पर ध्यान दिया जाएगा. भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए नौजवानों को इससे जोड़ने की जरूरत है. यह सभी चीजें हम क्रिकेट में देखते हैं, लेकिन यही चीज अन्य खेलों में भी लाने की जरूरत है. वैश्विक स्तर पर भारत की ब्रांडिंग करने के लिए यह एक सुअवसर है. साथ ही भारत की युवा शक्ति की पहचान कराने का यह सबसे बड़ा अवसर है.

भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कही है. उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम में सवालिया लहजे में कहा कि इतना बड़ा अवसर जब भारत में आ रहा है, तो हम सिर्फ मेजबान बनकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे? उनका कहना है कि इस पूरे वर्ष को फुटबॉल मय बना दिया जाए. स्कूलों में, कॉलेजों में, हिन्दुस्तान के हर कोने पर हमारे नौजवान, हमारे स्कूलों के बालक पसीने से तर-ब-तर हों. चारों तरफ फुटबॉल खेला जाए. अगर हम यह करेंगे तो मेज़बानी का मज़ा आएगा इसलिए हम सब की कोशिश होनी चाहिए कि फुटबॉल को गांव-गांव और गली-गली तक कैसे पहुंचाएं.

एशिया के साथ ही पूरी दुनिया में भारत फुटबॉल में कभी अच्छा प्रदर्शन करने वालों में गिना जाता था. 1951, 1962 एशियन गेम्स में भारत ने गोल्ड मेडल जीता था और 1956 में ओलंपिक खेलों में भारत चौथे स्थान पर रहा था. लेकिन दुर्भाग्यवश भारत पिछले कुछ दशकों में बेहद निचले पायदान पर चला गया. फीफा विश्व रैंकिंग में भारतीय टीम 160वें पायदान पर पहुंच गई है. भारतीय टीम के पास मौजूदा समय में 142 अंक है. एशियाई देशों में ईरान 44वें स्थान के साथ शीर्ष पर है. रैंकिंग में बेल्जियम शीर्ष स्थान पर और विश्वकप उप-विजेता अर्जेंटीना दूसरे जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर है. विश्व चैंपियन जर्मनी चौथे और पांच बार का चैंपियन ब्राजील छठे स्थान पर है.

भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए आस्ट्रेलिया की फुटबॉल स्टार अकादमी (एफएसए) भारत में फुटबॉल ट्रेनिंग सेंटर खोलने जा रही है. एफएसए कोयंबटूर में सबसे पहले अपना पहला ट्रेनिंग सेंटर खोलगी. एफएसए ऑस्ट्रेलिया के कोच और व्यवसायी विकास प्रबंधक डेविड थॉमसन का कहना कि एफएसए रॉक्स पालीकूडम के साथ मिलकर ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू करेगा. जिससे खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा को निखारने का मौका मिलेगा. अकादमी विभिन्न खेल सुविधाओं के लिए संटेर ऑफ एक्सिलेंस बनाने में भी मदद करेगी, जिसमें उभरते हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे. एफएसए के 56 केंद्रों के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रत्येक सप्ताह 5000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग मिलती है.

इसके साथ ही आस्ट्रेलिया फुटबॉल महासंघ आस्ट्रेलियाई सरकार के साथ मिलकर भारत में जमीनी स्तर पर फुटबॉल के विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा. इस कार्यक्रम का आयोजन आस्ट्रेलिया फुटबॉल महासंघ केरल में करेगा. केरल के अलावा अन्य राज्यों में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए आस्ट्रेलियाई फुटबॉल महासंघ अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और भारतीय खेल प्राधिकरण से बात कर रहा है. इस कार्यक्रम का नाम जस्ट प्ले है. आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली विशप ने कहा कि जस्ट प्ले कार्यक्रम बच्चों को समाजिक संबंध बनाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा.उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मकसद छह से 12 साल के बच्चों को फुटबॉल का सकारात्मक अनुभव देना है.

फीफा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष जियानी इनफैनटिनो आगामी वर्षों में भारत में इस खेल को बढ़ते देखना चाहते हैं. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के प्रमुख प्रफुल्ल पटेल को जियानी इनफैनटिनो के साथ अच्छे संबंध होने की उम्मीद है. वह उनके साथ देश में खेल के विकास के लिए काम करना चाहते हैं. इंडियन सुपर लीग क्लब एथलेटिको -डि -कोलकाता और स्पेन के ला-लीगा चैंपियन एटलेटिको मैड्रिड ने भारत में नई फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने के लिए एक संयुक्त कार्यक्रम की घोषणा की है.

भारत में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए पहले से कई अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित होते आ रहे हैं. लेकिन उसका प्रभावशाली असर जमीनी स्तर देखने को नहीं मिल रहा है. भारत के लोगों में खासकर युवाओं में फुटबॉल को लेकर उत्साह है. इसलिए इसे जमीनी स्तर बढ़ावा देने की जरूरत हैं. कई यूरोपियन क्लब और फुटबॉल ट्रेनिंग सेंटर भारतीय संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य तो करते हैं, लेकिन वह उस कार्यक्रम जारी नहीं रखते. प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि फुटबॉल को बढ़ावा देने की जरूरत है. इसलिए फुटबॉल को भी अगर क्रिकेट की तरह आगे ले जाना है और गली-मोहल्लों तक लोकप्रिय बनाना है, तो हमें सच में जमीनी स्तर पर कार्य करने होंगे.

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