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खत्म हो गया बंगाल का वर्चस्व

संतोष ट्रॉफी में गोवा की जीत ने भारतीय फुटबॉल में एक नए दौर का सबूत दे दिया है. इस जीत ने साबित कर  दिया है कि भारतीय फुटबॉल की जान अब गोवा में बसती है. सालों से भारतीय फुटबॉल के मक्का रहे बंगाल की हार ने बंगाल के क्लबों और खिलाड़ियों को सोचने पर मज़बूर कर ही दिया है, साथ ही भारत के फुटबॉल प्रेमियों के मन में भी यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय फुटबॉल में कोलकाता के वर्चस्व का दौर ख़त्म हो गया है? संतोष ट्रॉफी में गोवा की बंगाल पर भारी जीत से तो ऐसा ही कुछ लगता है. इसी साल गोअन क्लब चर्चिल ब्रदर्स ने क्लब फुटबॉल की आई-लीग  जीतकर प्रदेश का झंडा बुलंद किया था. अब संतोष ट्रॉफी में गोवा की जीत से भारतीय फुटबॉल ऩक्शे से इस साल बंगाल का सूपड़ा ही साफ हो गया. बरसों से भारतीय फुटबॉल पर राज करने वाले बंगाल के क्लबों को अब दोबारा सोचना पड़ेगा.  हालांकि इस जीत से गोवा की टीम को बड़ी संतुष्टि मिली होगी. यह गोवा के फुटबॉल एसोसिएशन का स्वर्ण जयंती साल है और गोवा के प्रभुत्व से उसे एक बेहतरीन तोहफा भी मिल गया है. साथ ही इस जीत ने उस हार की याद धुंधली कर दी होगी जब आज से दस साल पहले गोवा को बंगाल ने संतोष ट्रॉफी के फाइनल में 5-0 से हराया था. इस बार गोवा ने इसी अंतर से बंगाल को पछाड़ कर उस हार का बदला ले लिया है और साथ ही यह भी साबित कर दिया है कि भारत के घरेलू फुटबॉल लीग में समीकरणों में बदलाव आ गया है.   1995 से लेकर 2001 तक गोवा और बंगाल संतोष ट्रॉफी के फाइनल में भिड़ते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब गोवा ने बंगाल को हराया है. गोवा के फुटबॉल के लिए यह जीत कई तीखी हारों के बाद आई है, इसलिए इसका स्वाद और भी मीठा है. इसने भारतीय फुटबॉल के लिए भी एक नई राह खोल दी है, बंगाल और गोवा की तरह और राज्य भी अगर मुक़ाबले में आ सकें तो शायद  भारतीय फुटबॉल को एक नई सांस मिल जाएगी.

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