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हॉकी : आसान नहीं होगी ओलंपिक पदक की राह
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हॉकी : आसान नहीं होगी ओलंपिक पदक की राह

hockeyभारतीय हॉकी टीम ने आखिरी बार ओलंपिक पदक साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक में जीता था. 36 साल से चले आ रहे पदक के इस सूखे को दूर करने की कोशिश में भारतीय हॉकी टीम जुटी हुई है. हाल ही में मलेशिया में संपन्न हुई अजलान शाह हॉकी प्रतियोगिता के 25 वें संस्करण में भारतीय टीम उपविजेता रही. फाइनल मुक़ाबले में विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 4-0 से हराकर रिकॉर्ड नौंवी बार अजलान शाह कप पर कब्जा किया. भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर सधे हुए अंदाज में पूरा किया था, लेकिन अंजाम वैसा नहीं हो सका. लीग मैचों में उसे दो मैचों मे हार का सामना करना पड़ा. मलेशिया के खिलाफ आखिरी लीग मैच में भारत के सामने करो या मरो वाली स्थिति थी.

ऐसे में भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और मलेशिया को 6-1 के अंतर से मात देकर फाइनल में जगह बनाई. लंदन ओलंपिक के बाद चार सालों में भारत महज एक बार अलजान शाह कप के फाइनल में जगह बना सका, जबकि विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया चार बार फाइनल में पहुंचा और तीन बार खिताब पर कब्जा किया. पिछले साल फाइनल में न्यूजीलैंड ने उसे मात दी थी. इस साल अगस्त में ब्राजील के रियो में ओलंपिक का आयोजन होना है. आठ बार की ओलंपिक चैंपियन टीम से सवा अरब भारतीयों को पदक की आस है.

लेकिन भारतीय टीम का जैसा प्रदर्शन इस प्रतियोगिता में रहा है क्या उस प्रदर्शन के बल पर भारतीय टीम रियो में पोडियम तक पहुंचने में कामयाब होगी. साल 2012 में लंदन ओलंपिक से पहले भी भारतीय टीम अजलान शाह कप में कांस्य पदक जीता था. इसके बाद ओलंपिक में भारतीय टीम ने बेहद खराब प्रदर्शन किया और अंतिम पायदान पर रही.

इसलिए इस बार भी पूरे निश्चय के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि टीम की तैयारियां पुख्ता हैं. हालांकि भारतीय टीम के कोच ओल्टमस अजलान शाह कप से पहले यह कह चुके हैं कि रियो ओलंपिक में भारत से स्वर्ण पदक की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं होगा. उनका मानना है कि उनकी टीम अभी शीर्ष 6 में जगह बनाने पर ध्यान दे रही है और इससे बेहतर प्रदर्शन बोनस होगा.

अजलान शाह कप में भारतीय टीम को फाइनल सहित कुल सात मैचों में से तीन में हार का सामना करना पड़ा. ऑस्ट्रेलिया ने भारत को लीग मैच में 5-1 से और न्यूजीलैंड ने 2-1 के अंतर से मात दी. वहीं फाइनल में भारतीय टीम को 4-0 से हार मिली. ऑस्ट्रेलिया का सामना भारतीय टीम नहीं कर सकी और उनके डिफेंस को भेद पाने में नाकामयाब रही. उनके खिलाफ दो मुक़ाबलों में महज़ एक गोल कर सकी. हालांकि पूरी प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने 18 गोल किए और गोल करने के मामले में टीम इंडिया विजेता ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर रही. भारतीय टीम ने आक्रामक अंदाज में पाकिस्तान को 5-1 और मलेशिया को 6-1 के गोल अंतर से मात दी.

भारत ने ओलंपिक से पहले अपनी बेंच स्ट्रेंथ को परखने के लिए इस टूर्नामेंट के लिए युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के मिश्रण वाली टीम भेजी थी. स्वदेश लौटने के बाद कप्तान सरदार सिंह ने कहा कि यह उन युवाओं के लिए अच्छा अनुभव था, जो पहली बार सीनियर टीम के साथ खेल रहे थे. विशेषकर हरमनप्रीत, सुरेंद्र और हरजीत ने अपने खेल से दिखा दिया कि वे उच्च स्तर पर खेलने के लिए सक्षम हैं. ये सभी खिलाड़ी टीम में अच्छी तरह से फिट हो गए. वहीं कोच कोच रोलैंट ओल्टमस भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश हैं. उन्होंने रजत पदक जीतने के कहा कि यह रियो ओलंपिक के लिए हमारी अच्छी तैयारी है.

हमने अपनी कुछ कमियों को पहचाना है जो ऐसी प्रतियोगिताओं में साफ पता चल जाती हैं. अब हम इन कमियों पर काम कर सकते हैं ताकि ओलंपिक में अपना मजबूत प्रदर्शन सुनिश्चित कर सकें. भले ही भारतीय टीम को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल करके ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया, लेकिन उसके लिए अभी भी यूरोपीय टीमों और ऑस्ट्रेलिया से पार पाना मुश्किल नज़र आ रहा है. भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के सामने अधिकांश मौकों पर हथियार डाल देती है, टीम के पास उसका तोड़ नहीं है. रियो ओलंपिक में भारत को ग्रुप-बी में ओलंपिक चैंपियन जर्मनी, अर्जेंटीना, कनाडा, आयरलैंड और नीदरलैंड के साथ जगह मिली है.

जबकि ग्रुप-ए में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, ग्रेट ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और स्पेन हैं. दोनों ग्रुप्स से दो टॉप टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी. यदि भारतीय टीम किसी तरह सेमीफाइनल में जगह बना भी लेती है तो वहां उसका मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया, स्पेन या न्यूजीलैंड से होगा. इन टीमों के ख़िलाफ पिछले 4 सालों में भारतीय टीम का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. जर्मनी दो बार से ओलंपिक चैंपियन है, वहीं स्पेन ने लंदन ओलंपिक में रजत पदक हासिल किया था. लंदन ओलंपिक में भारत 12 वें स्थान पर रहा था. जबकि 2008 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर सका था. ऐसे में भारतीय टीम से पदक जीतने की आशा कैसे की जा सकती है. भारत के अलावा इस बार और कोई एशियाई टीम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी है, इसलिए ओलंपिक में भारत के ऊपर पूरे एशिया की नज़रें रहेंगी.

अजलान शाह कप में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, कनाडा, जापान और मलेशिया टीमों ने भाग लिया था. इन टीमों में से भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है, इनमें से केवल कनाडा के खिलाफ ही भारतीय टीम जीत हासिल कर सकी. इससे टीम की ओलंपिक की तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि भारतीय टीम के पास अपनी तैयारियों को आंकने का एक मौका अभी भी शेष है. लंदन में 10 से 17 जून के बीच चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होना है, चैंपियन्स ट्रॉफी में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ग्रेट-ब्रिटेन, बेल्जियम और दक्षिण कोरिया का सामना करना है. दक्षिण कोरिया के अलावा अन्य सभी टीमें ओलंपिक में भाग लेंगी. ऐसे में इन टीमों के खिलाफ जीत दर्ज किए बगैर ओलंपिक की तैयारियों को पुख्ता कर पाना असंभव है. प

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