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Tag: आंदोलन

नए जातिगत झमेले में झारखंड, अब कुर्मी और आदिवासी आमने-सामने

नए जातिगत झमेले में झारखंड, अब कुर्मी और आदिवासी आमने-सामने

1950 में कुर्मी को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाकर ओबीसी में शामिल किया गया था. अब कुर्मी और तेली फिर से खुद को आदिवासी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन आदिवासी इनकी दलीलों और मांगों को...

लोक के खिलाफ तंत्र का मारक मंत्र

लोक के खिलाफ तंत्र का मारक मंत्र

अपने हक़ की आवाज़ लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हर भारतीय को यक़ीन होता है कि जंतर-मंतर से संसद तक सीधे आवाज़ पहुंचाई जा सकती है. लेकिन हृदयहीन सत्ता जनता की आवाज़ को पर्यावरण का नुक़सान समझती है. कई सफल आंदोलनों...

नया स्वघोषित ख़लीफ़ा

नया स्वघोषित ख़लीफ़ा

खिलाफ़त आंदोलन को भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. इस आंदोलन के 94 सालों के बाद अब हमें एक नया ख़लीफ़ा मिल गया है, जो यह दावा करता है कि उसे सुन्नी मुसलमानों का समर्थन हासिल है. महात्मा गांधी...

नियमगिरि का श्रेय लेने को आतुर राहुल

नियमगिरि का श्रेय लेने को आतुर राहुल

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की हालत एक ऐसे अदूरदर्शी और आत्ममुग्ध नेता जैसी है, जो हर वक्त अपनी तारीफ़ सुनने को बेताब रहता है. वह जब भी आदिवासियों का ज़िक्र करते हैं, तो नियमगिरि का नाम लेना नहीं भूलते. उनकी...

आशाओं और आशंकाओं के फैसले का वक्त

आशाओं और आशंकाओं के फैसले का वक्त

मुझसे एक अजीब सवाल पूछा गया कि क्या अन्ना का आंदोलन समाप्त हो गया? क्या अन्ना शांत होकर बैठ गए? क्या इतने शांत हो गए हैं कि देश में जो भी हो रहा है या जो भी होने वाला है,...

उत्पादक को न्याय मिले

उत्पादक को न्याय मिले

कुछ वस्तुओं के बारे में यह भी माना जा सकता है कि उनकी क़ीमत कुछ ब़ढ भी सकती है, लेकिन इसका निष्कर्ष यह नहीं हो सकता कि ग्रामीण उत्पाद को न्याय नहीं मिला. महंगाई ब़ढने के कारण सरकारी कर्मचारियों का...

ताक़त का सही उपयोग कैसे करें

ताक़त का सही उपयोग कैसे करें

ताक़त का उपयोग आंदोलन करने के लिए किस प्रकार किया जाए? विभिन्न किसान संगठनों ने इसके लिए मोर्चा, जुलूस, रास्ता रोको, चक्का जाम, घेराव, बंद एवं अन्य तरीकों का उपयोग किया. इससे जागृति आई, संगठन बना और किसानों में आत्मविश्‍वास...

संगठन और आंदोलन

संगठन और आंदोलन

अत: किसान और मज़दूर, दोनों का हित इसी में है कि कृषि से उत्पादित वस्तुओं का वाजिब दाम मिले और गांव में सुधरी हुई खेती एवं ग्रामोद्योग का जाल बिछे. आज किसान एवं मज़दूर, दोनों छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर आपस...

4000 स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध-प्रदर्शन – ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा क्यों दे रही है सरकार

4000 स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध-प्रदर्शन – ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा क्यों दे रही है सरकार

स्थायी नौकरी के बदले अनुबंध पर काम कराने का चलन दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. इसीलिए ठेकेदारी प्रथा को बंद कर पक्की नौकरी देने की मांग भी उठ रही है, लेकिन सरकार को इससे कोई मतलब ही नहीं है....

जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा सुपर फ्लॉप हो सकती है, क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि हिंदुस्तान के लोगों को देश से कोई मतलब नहीं है. उन्हें अपने पेट के लिए रोटी और अपने भविष्य की चिंता ज़्यादा होती...

तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ

तू एक था मेरे अशआर में हज़ार हुआ

फ़िराक़ गोरखपुरी बीसवीं सदी के वह शायर हैं, जो जंगे-आज़ादी से लेकर प्रगतिशील आंदोलन तक से जुडे रहे. उनकी ज़ाती ज़िंदगी बेहद कड़वाहटों से भरी हुई थी, इसके बावजूद उन्होंने अपने कलाम को इश्क़ के रंगों से सजाया. वह कहते हैं-...

ग्रामसभा के अधिकार!

ग्रामसभा के अधिकार!

हमने देखा कि पंचायती राज की वर्तमान योजना के अंतर्गत आज जो पंचायतें हैं, वे गांधी जी की कल्पना की पंचायतों से पूरी तरह से भिन्न हैं. आज की पंचायतें तो प्रातिनिधिक व्यवस्था का ही एक अंग हैं. उनमें जनता...

ओडिशा में पोस्को के ख़िलाफ़ आंदोलन – ज़ुल्म की इंतिहा है जहां

ओडिशा में पोस्को के ख़िलाफ़ आंदोलन – ज़ुल्म की इंतिहा है जहां

जगतसिंहपुर ज़िले में स्थानीय ग्रामीण कोरियाई स्टील कंपनी पोस्को का विरोध पिछले सात वर्षों से कर रहे हैं. महिला दिवस (8 मार्च)  की पूर्व संध्या पर गोविंदपुर गांव की महिलाओं ने जिस तरह अर्द्धनग्न प्रदर्शन किया, उससे प्रदेश की राजनीति...

समस्या और उसका निराकरण

समस्या और उसका निराकरण

राजनीतिक पार्टियों में अच्छे लोग नहीं हैं, यह बात नहीं है, पर सवाल अच्छे लोगों का नहीं, बल्कि नीतियों एवं योजनाओं का है. भले और अच्छे लोग भी अगर पुरानी नीतियों और पुराने ढांचे पर ही निर्भर करते रहें, तो...

एक आंदोलन- ताकि यमुना कैदमुक्त हो

एक आंदोलन- ताकि यमुना कैदमुक्त हो

1990 में शुरू हुआ आर्थिक उदारीकरण अब अपना असर दिखा रहा है. ख़ुशहाली से भरे सपनों का गुब्बारा फटने लगा है. व्यवस्था के ख़िलाफ़ आक्रोश और व्यवस्था के प्रति नाराज़गी बढ़ती ही जा रही है. देश भर में हज़ारों आंदोलन...

परिवर्तन की शताब्दी

परिवर्तन की शताब्दी

एक सौ दो साल पहले दिल्ली में ब्रिटिश शासक को ताज पहनाया गया था. उस समय ब्रिटिश साम्राज्य में सूर्यास्त नहीं होता था और पूरे विश्‍व के नक्शे पर लाल निशान दिखाई पड़ता था, जो ब्रिटिश राज का रंग था....

एक चुनौतीपूर्ण समय

एक चुनौतीपूर्ण समय

देश एक कठिन समय से गुज़र रहा है, मुद्दे कई हैं, जिन्हें चुनाव से पहले तक निपटाना है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये मुद्दे समय रहते निपट जाएंगे? चौथी दुनिया का विश्‍लेषण… अगर रिश्‍वत की बात छोड़...

जेंडर रिवोल्यूशन जारी रहना चाहिए

जेंडर रिवोल्यूशन जारी रहना चाहिए

क्रांति एक ही बार में नहीं होती, बल्कि यह सतत होती रहती है. 14 जुलाई, 1789 को बास्तील के पतन के साथ ही फ्रांस की क्रांति की घोषणा हुई थी, लेकिन इस क्रांति की शुरुआत बहुत पहले हो गई थी...

यह संसद संविधान विरोधी है

यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और...

पटना गांधी मैदान से शुरू होगी परिवर्तन की लड़ाई

पटना गांधी मैदान से शुरू होगी परिवर्तन की लड़ाई

भारतीय लोकतंत्र के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण है. लोगों का इस व्यवस्था से भरोसा उठने और उसके नतीजे के तौर पर जनता के सड़क पर उतरने की घटनाएं लगातार जारी हैं. दामिनी वाली घटना में जिस तरह से...

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़...

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में, श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली. विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष...

न थकेंगे, न झुकेंगे

न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले...

अब अन्ना की नहीं, आपकी परीक्षा है

अब अन्ना की नहीं, आपकी परीक्षा है

अन्ना हज़ारे और जनरल वी के सिंह ने बनारस में छात्रों की एक बड़ी सभा को संबोधित किया. मोटे अनुमान के हिसाब से 40 से 60 हज़ार के बीच छात्र वहां उपस्थित थे. छात्रों ने जिस तन्मयता एवं उत्साह से...

रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश...

यह आम आदमी की पार्टी है

यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के...

मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी...

किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी...

अन्ना हजारे की प्रासंगिकता बढ़ गई

अन्ना हजारे की प्रासंगिकता बढ़ गई

कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की पूरी कोशिश है कि अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे आपस में लड़ जाएं. अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे इस तथ्य को कितना समझते हैं, पता नहीं. लेकिन अगर उन्होंने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया,...

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