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Tag: कारखाना

दारिद्रय क्यों और कैसे?

दारिद्रय क्यों और कैसे?

अट्ठारहवीं सदी में भारत के गांवों एवं कृषि का स्वरूप क्या था, इस विषय में काफी शोध हुआ है. इससे पता चलता है कि भारत के गांवों में खेती और उद्योग दोनों चलते थे. कोई भूमिहीन मज़दूर नहीं था. छोटे...

वोट की पटरी पर सवार रेल बजट

वोट की पटरी पर सवार रेल बजट

रेल भारत की रीढ़ है और इसका इस्तेमाल आम एवं खास सभी लोग करते हैं. ऐसी स्थिति में जाहिर है कि सभी को रेल बजट का इंतजार होता है. इसी का फ़ायदा उठाकर सियासी पार्टियां इसे जनता के लिए कम...

सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से...

फैक्टरी एक्ट

फैक्टरी एक्ट

भारत में भी इस सदी की शुरुआत में, अंग्रेजों की पहल से फैक्टरी एक्ट्‌स बने और लागू हुए. इन क़ानूनों की कृपा से यह हुआ कि निश्चित उम्र से कम उम्र के बालकों से कोई काम कतई नहीं लिया जा...

राष्ट्र और पूंजी

ध्‍यान देने की बात यह है कि ये पूंजीवादी धनिक उन्हीं चीज़ों में अपने रुपये लगाते हैं या दूसरों से लेकर लगाते हैं, जहां इनको जल्दी से जल्दी ज़्यादा से ज़्यादा मुना़फा नज़र आता है. देश के लिए क्या काम...

समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर

समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर

वर्ष 1881 में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित समस्तीपुर रेलवे कारखाना सरकारी उदासीनता के चलते बंदी की कगार पर पहुंच गया है. यह उत्तर बिहार का इकलौता रेलवे कारखाना है. यहां 1907 में हुई हड़ताल ट्रेड यूनियन आंदोलन की अमूल्य धरोहर...

चूडी़ मजदूरों की जिंदगी बेहाल

चूडी़ मजदूरों की जिंदगी बेहाल

पुरानी कहावत है कि दिया तले हमेशा अंधेरा रहता है. यह बात पूरी तरह देश के कांच उद्योग फिरोज़ाबाद पर लागू होती है. फिरोजाबाद के कांच उद्योग ने अपनी कला से न स़िर्फ देश की सुहागिनों की कलाइयों को सजाया...

हिंदुस्‍तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन बरौनीः विकास के वादे कहां गए

हिंदुस्‍तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन बरौनीः विकास के वादे कहां गए

बिहार का बरौनी स्थित हिंदुस्तान फर्टिलाइज़र कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल). 1990 के आसपास इस कारखाने में अच्छी ख़ासी मात्रा में उर्वरक का उत्पादन होता था, लेकिन 2002 में केंद्र में एनडीए और बिहार में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल के दौरान...

बेंत तस्करी से अधिकारी अंजान

बेंत तस्करी से अधिकारी अंजान

बेंत का सोफा हो या कुर्सी, डायनिंग टेबल हो या टोकरी, अगर आपको ये सारी चीज़ें खरीदनी हैं तो इसके लिए महज़ छह से सात हज़ार रुपये खर्च करने होंगे और संपर्क करना होगा नेपाल के किसी कारीगर से. वजह,...

शोषण के शिकार बीड़ी मजदूर

शोषण के शिकार बीड़ी मजदूर

कवि धूमिल की यह कविता बताती है कि आज़ादी के इतने साल बाद श्रम करने वाले आज भी हताश और लाचार हैं. हिंद स्वराज के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी को याद करने में तो देश के...

सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप...

कोयले की तस्करी से 350 करोड़ की चपत

कोयले की तस्करी से 350 करोड़ की चपत

भिलाई इस्पात संयंत्र में काले हीरे की कालाबाज़ारी इस तरह चलती है कि प्रतिवर्ष अरबों रुपये का लेनदेन अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस के साथ मिलकर खुलेआम कर लिया जाता है. इस धंधे में लगे हुए ठेकेदार कहने को तो कोयले...

पेपर मिल चालू नहीं हो सकी

पेपर मिल चालू नहीं हो सकी

शासन और विकास को अमलीजामा पहनाने की कवायद करने वाली राज्य की नीतीश सरकार भी बैजनाथपुर पेपर मिल की चिमनी से धुआं उगलवाने में नाकाम साबित हो रही है. हालांकि खगड़िया के वर्तमान सांसद एवं सूबे के तत्कालीन उद्योग मंत्री...

औद्योगिक विकास का अभिशाप भोगता बचपन

औद्योगिक विकास का अभिशाप भोगता बचपन

रायगढ़ की पहचान छत्तीसगढ़ राज्य के संपन्न औद्योगिक क्षेत्र के रूप में बनी हुई है. यहां इस्पात एवं लौह धातुकर्म उद्योग के साथ ऊर्जा उत्पादन की इकाइयों की स्थापना करने के बाद अब पूरे रायगढ़ ज़िले को ऊर्जा केन्द्र बनाने...

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