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Tag: गांधी

सावरकर पर शिवसेना-कांग्रेस में ठनी, संजय राउत ने राहुल से कहा-वह पूरे देश के देवता समान

सावरकर पर शिवसेना-कांग्रेस में ठनी, संजय राउत ने राहुल से कहा-वह पूरे देश के देवता समान

हुल गांधी के वीर सावरकर के बयान पर कांग्रेस और शिवसेना आमने सामने आ गई हैं. शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि वीर सावरकर  केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के लिए ‘देवता’ के समान हैं....

150वीं गांधी जयंती पर बापू को देश का नमन, PM मोदी-सोनिया ने राजघाट पहुंच दी श्रद्धांजलि

150वीं गांधी जयंती पर बापू को देश का नमन, PM मोदी-सोनिया ने राजघाट पहुंच दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आज दुनियाभर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भव्य आयोजन किए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर नई दिल्ली के...

वरुण के नाम पर इतनी चिल्लपों क्यों!

वरुण के नाम पर इतनी चिल्लपों क्यों!

भारतीय जनता पार्टी खुद यह तय नहीं कर पा रही कि उसे गांधी के नाम से एलर्जी है या घबराहट. वरुण गांधी का नाम सामने आते ही भाजपा के कुछ खास वरिष्ठ नेताओं में कुछ अधिक ही बेचैनी दिखने लगती...

गांधी की विरासत नहीं बदल सकी अमेठी की किस्मत

गांधी की विरासत नहीं बदल सकी अमेठी की किस्मत

अमेठी संसदीय क्षेत्र से नेहरू-गांधी परिवार का रिश्ता बहुत पुराना है. अमेठी में इस परिवार का आगमन 1975 में हुआ था. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने अमेठी के अतिपिछड़े गांव खेरौना में काम करना...

व़क्त की नज़ाक़त को समझे केंद्र सरकार

नेल्सन मंडेला अब हमारे बीच नहीं रहे. महात्मा गांधी के बाद वह एक मात्र व्यक्ति थे, जो मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के जीते-जागते अवतार थे. वे तक़रीबन 26-27 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका के रॉबेन आइलैंड में कैदी के तौर पर...

सत्य ही ईश्‍वर है

सत्य ही ईश्‍वर है

गांधी जी की आत्मकथा सत्य के प्रयोग, विद्यार्थी-जीवन में पढ़ी थी. उसके बाद से अब तक बहुत पानी बह चुका था. फिर से पढ़ने की प्रेरणा हुई. स्वयं को शुद्ध कैसे किया जाए. इसके बारे में उनके अनुभव शायद मेरे...

आज़ादी के लिए ख़तरे

आज़ादी के लिए ख़तरे

आज हिंदुस्तान में गरीबी रेखा के नीचे करीब-करीब उतने ही लोग हैं, जितनी आजादी के समय देश की कुल आबादी थी. देश के लाखों गावों के लोगों में इतनी भी शक्ति नहीं है कि वे एक भी सूखे या बाढ़...

सत्ता के पूर्ण विकेंद्रीकरण से संभव है : पार्टीविहीन लोकतंत्र

सत्ता के पूर्ण विकेंद्रीकरण से संभव है : पार्टीविहीन लोकतंत्र

गांधी और जेपी की सोच पार्टीविहीन लोकतंत्र को कभी उभरने नहीं दिया गया, क्योंकि अगर ऐसा होता, तो आज जो राजनीतिक दल सत्ता पर कुंडली मारे बैठे हैं, उनका अस्तित्व ही ख़त्म हो चुका होता. गांधी और जेपी का यह...

जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा सुपर फ्लॉप हो सकती है, क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि हिंदुस्तान के लोगों को देश से कोई मतलब नहीं है. उन्हें अपने पेट के लिए रोटी और अपने भविष्य की चिंता ज़्यादा होती...

इतिहास कभी मा़फ नहीं करता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंद्रह अगस्त को लाल क़िले से देश को संबोधित किया. संबोधन से पहले लोग आशा कर रहे थे कि वह उन सारे सवालों का जवाब देंगे, जो देश के सामने हैं या जिन्हें उनके सामने उठाया...

गांधी परिवार का प्रभाव घट रहा है

गांधी परिवार का प्रभाव घट रहा है

यह कहना कि यूपीए सरकार अपनी दिशा खो रही है, कमबयानी होगा. लेकिन यही कमबयानी राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण सवालों को रेखांकित भी करती है. क्या हम भारतीय राजनीति में नेहरू-गांधी परिवार के प्रभाव के खत्म होने...

कांग्रेस और भाजपा में कोई फर्क नहीं

कांग्रेस और भाजपा में कोई फर्क नहीं

मुझे लगता है कि यह सरकार एक मृतप्राय सरकार है. कोई लोगों ने सरकार से गुज़ारिश की कि गांधी जी की यादों से जुड़ी वस्तुओं की नीलामी रोकी जाए, लेकिन यह सरकार जब अपने रोजमर्रा के ही काम नहीं कर...

बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का पूरा सच

बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है, लेकिन स़िर्फ धुएं के रूप में. चौथी दुनिया ने बोफोर्स कांड की एक-एक परत को खुलते हुए क़रीब से देखा है और हर एक परत का विश्लेषण पाठकों के समक्ष रखा...

भ्रष्टाचार का चस्का और आम आदमी

सही मायनों में अपनी आवाज़ को सीधे संवाद के ज़रिये जन-जन तक पहुंचाने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम आज भी नाटक को ही माना जाता है. नाटक मंचन और इसी की एक विधा नुक्कड़ नाटकों के ज़रिये न स़िर्फ दर्शकों से सीधा...

जन संवाद यात्रा : अब गांधी और मार्क्स नहीं, ज़मीन चाहिए

जन संवाद यात्रा : अब गांधी और मार्क्स नहीं, ज़मीन चाहिए

इस व़क्त देश में यात्राओं का दौर चल रहा है. मुद्दे तमाम हैं, भ्रष्टाचार से लेकर राजनीति तक, लेकिन इसमें समाज का वह अंतिम व्यक्ति कहां है जिसके उत्थान के लिए गांधी जी ने इस देश को एक ताबीज दिया...

गांधी-नेहरू ज़िंदाबाद

गांधी-नेहरू ज़िंदाबाद

दो अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है. यह दिन पाखंड, अतिशयोक्ति और बड़बोलेपन का होता है. इस दिन बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं. राष्ट्रपिता को हम लोग दो दिन ही याद रखते हैं, एक उनके जन्मदिवस पर और दूसरे...

वक्त की नज़ाकत को समझने की ज़रूरत

2 अक्टूबर बीत गया. पहली बार देश में 2 अक्टूबर सरकारी फाइलों और सरकारी समारोहों से बाहर निकल करके लोगों के बीच में रहा. लोगों ने गांधी टोपी लगाकर महात्मा गांधी को याद किया. न केवल महात्मा गांधी को याद...

इतिहास के आईने में

इतिहास के आईने में

जब भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई तो महात्मा गांधी ने कहा था, भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दे दी गई और वे शहीद हो गए. उनकी मौत कई लोगों के लिए व्यक्तिगत क्षति है.

राहुल जी, गांव में आपने क्या सीखा

बापू जब मोहनदास करमचंद गांधी थे, नौजवान वकील थे और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने गए तो उनके साथ एक हादसा हुआ. गोरों ने उन्हें प्रथम श्रेणी में बैठने के लायक़ नहीं समझा और ज़बरदस्ती गाड़ी से धक्का देकर बाहर...

गांधी, हजारे और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग

गांधी, हजारे और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग

अन्ना हजारे दूसरे गांधी के रूप में उभर रहे हैं. हर अख़बार उनके स्तुतिगान से लबरेज है. लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली समिति में सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों को शामिल करने की अन्ना की मांग यूपीए सरकार ने...

दून कोबाड गांधी भी पैदा करता है

दून कोबाड गांधी भी पैदा करता है

दून स्कूल का शीर्ष प्रबंधन इस बात को लेकर चिंता में है कि स्कूल के बच्चों के शिक्षण में कौन सी वर्गीय-खोट है जो कोबाड गांधी को पैदा करती है. दून स्कूल के उच्च वर्गीय चरित्र पर कोबाड गांधी एक...

सुदर्शन का साइड इफेक्‍ट

सुदर्शन का साइड इफेक्‍ट

विदेशी मूल से लेकर पति-सास की हत्या में संलिप्तता के आरोपों से घिरा सोनिया गांधी का कथित लांछनीय सियासी सफर हर दृष्टिकोण से सफल रहा है. यद्यपि उनके विरोधियों ने उक्त आरोपों के सहारे उनके सियासी क़दम को रोकने की...

सेंसर बोर्ड, फिल्‍में और राजनीति-3: मापदंड बदलने की जरूरत

सेंसर बोर्ड, फिल्‍में और राजनीति-3: मापदंड बदलने की जरूरत

गांधी जी ने एक बार सेंसरशिप को अपने अंदाज़ में परिभाषित करते हुए कहा था, इफ यू डोंट लाइक समथिंग, क्लोज़ योर आइज़. साउथ फिल्मों का सेंसर बोर्ड इस फलसफे के दोनों पहलुओं का इस्तेमाल करता है.

ज़िंदा होते तो गांधी पेन पर हंसते बापू

ज़िंदा होते तो गांधी पेन पर हंसते बापू

दुनिया की सबसे मशहूर और सबसे क़ीमती कलमें बनाने वाली कंपनी ने एक ऐसे आदमी के नाम पर एक लाख रुपये की कलम बनाने का फैसला क्यों किया, जिसने सारी उम्र हाथ से बने कपड़ों के अलावा और कुछ नहीं...

स्‍वाधीनता संग्राम और मुसलमान

स्‍वाधीनता संग्राम और मुसलमान

इस साल कांग्रेस अपना 125वां स्थापना दिवस मना रही है. भारत के सभी धर्मों के नागरिकों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ज़रिए स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया, परंतु हमारे नेताओं की बहुसंख्यकवादी मानसिकता और स्कूली पाठ्‌यक्रम तैयार करने वालों...

कांग्रेस जुआ न खेले तो अच्छा

कांग्रेस को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. बजट सत्र के इस द्वितीय चरण में उसके सामने ख़तरा पैदा हो सकता है. महिला आरक्षण बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा में पास होना है. श्रीमती सोनिया गांधी का स्पष्ट निर्देश है कि इसे...

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल – 16

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल – 16

नाव परिणामों से सब स्तब्ध थे. बुद्धिजीवी और धर्म निरपेक्ष ताक़तें सकते में थीं. वे मतदाताओं का मूड भांप नहीं पाए. सांप्रदायिक ताक़तों को हराने की उनकी सारी अवधारणाएं हवाई साबित हुईं. उनकी मान्यता थी कि गांधी का गुजरात धर्म...

अमिताभ को अपमानित मत करो

अमिताभ बच्चन को अभी और अपमान सहने पड़ सकते हैं. एक व्यक्ति के नाते उनकी व्यथा को कोई समझना नहीं चाहता. कोई से हमारा मतलब आम जनता से नहीं, बल्कि खास लोगों से है. ये खास लोग कांग्रेस से रिश्ता...

मनरेगा रोजगार नहीं, धोखा है

मनरेगा रोजगार नहीं, धोखा है

मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन हक़ीक़त यही है कि राज्य में कहीं भी ग्रामीण श्रमिकों को औसतन 60 दिन का काम भी नहीं मिल रहा...

आचार्य राममूर्ति जीवित इतिहास हैं

आचार्य राममूर्ति हमारे बीच में हैं और उसी शिद्दत के साथ हैं, जैसे 1954 में थे. 1938 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए इतिहास में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होकर उन्होंने बनारस के क्वींस कॉलेज में अध्यापन कार्य किया. 1954 में...

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