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Tag: गुजरात

दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

उत्तराखंड राज्य के मुखिया डा. रमेश पोखरियाल निशंक पर जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है, उससे इस बात की आशंका ब़ढ जाती है कि सूबे के मुखिया का दामन बेदाग़ नहीं है. यह बात...

मुन्‍नी अंश : मुन्‍नी मोबाइल – 14

मुन्‍नी अंश : मुन्‍नी मोबाइल – 14

आनंद भारती को सूरत से अहमदाबाद लौटना था. इस बीच उन्हें पता लगा कि गोधरा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शंकर सिंह वाघेला जनसभा करने वाले हैं. गोधरा अग्निकांड के बाद वहां होने वाला वह पहला राजनीतिक कार्यक्रम था. आनंद भारती...

अदानी समूह पर सरकार मेहरबान

अदानी समूह पर सरकार मेहरबान

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में बिजली संकट और कोयला संकट से निपटने के लिए जिस उदारता से निजी क्षेत्र का सहयोग लेती आई है, उससे घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार के संदेह जन्म लेने लगे हैं. विशेष रूप से गुजरात के...

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 13

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 13

वह बोलते, गुजरात अब माखनचोर कृष्ण नहीं रहा है. वह अब जवान हो गया है. उसके हाथ में सुदर्शन चक्र है. इस तरह वह मुसलमानों को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाते. रामजन्म भूमि आंदोलन के बाद गुजरात में राम की जगह...

पुस्‍तक अंश : मुन्‍नी मोबाइल – 12

पुस्‍तक अंश : मुन्‍नी मोबाइल – 12

विधानसभा भंग होने के बावजूद यह तय नहीं हो पा रहा था कि प्रदेश में चुनाव कब होंगे. निर्वाचन आयोग को राज्य में चुनाव करवाने के लिए स्थिति अनुकूल नहीं लग रही थी. अगस्त माह में केंद्रीय चुनाव आयोग ने...

सांप्रदायिक हिंसा विधेयक रोग से बदतर इसका इलाज है

सांप्रदायिक हिंसा विधेयक रोग से बदतर इसका इलाज है

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार को संसद के बजट सत्र में सांप्रदायिक हिंसा विधेयक प्रस्तुत करने की मंज़ूरी दे दी है. इस विधेयक का मूल प्रारूप सन्‌ 2005 में तैयार हुआ था. सन्‌ 2002 के गुजरात क़त्लेआम में भाजपा सरकार व...

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 11

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 11

शिविरों में नवजात बच्चों की मां से मिलने आनंद भारती निकलते हैं तो उनकी भी आंखें नम हो जाती हैं. नूरजहां बेगम से जब वह मुख़ातिब होते हैं तो उसके चेहरे पर बच्ची जनने की मुस्कान अनुपस्थित है. बावजूद इसके...

जो बोलेगा, सो झेलेगा

जो बोलेगा, सो झेलेगा

हिंदी के मशहूर लेखक एवं नाटककार मुद्राराक्षस बेहद गुस्से में थे. आक्रामक मुद्रा और तीखे स्वरों में लगभग चीखते हुए उन्होंने सवाल किया कि यह देश किसका है, किसके लिए है. हत्यारे, लुटेरे, बलात्कारी, दलाल, तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं....

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल – 10

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल – 10

गुजरात में दंगे जारी थे. नए-नए इलाक़े दंगों की आग में शामिल होते जा रहे थे. जंगलों में रहने वाले आदिवासियों को भी इसकी आग ने नहीं बख्शा. अंबाजी से लेकर बलसाड तक की आदिवासी पट्टी भी झुलस गई. इस...

दर्द से कराहती ज़िंदगी दूषित पानी से विकलांग होते ग्रामीण

दर्द से कराहती ज़िंदगी दूषित पानी से विकलांग होते ग्रामीण

यूनीसेफ की सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक़ पूरे भारत वर्ष के 20 राज्य के ग्रामीण अंचलों मे रहने वाले लाखों लोग फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से फ्लोरोसिस के शिकार हैं. सर्वाधिक प्रभावित राज्यों मे आंध्रप्रदेश, गुजरात एवं राजस्थान है, जहां...

राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

इतिहास में गर्भ में न जाने कितने राज़ द़फन हैं. राजा महाराजाओं की विरासत से लेकर विलुप्त हो चुकी संस्कृतियों की जानकारी इसी गर्भ से हासिल होती है. लेकिन कुछ गुत्थियां ऐसी होती हैं जो अनसुलझी ही रह जाती हैं....

बंगाल के मुसलमानों को दिखी उम्‍मीद की किरण

बंगाल के मुसलमानों को दिखी उम्‍मीद की किरण

आख़िरकार बंगाल सरकार ने संसद में रखी गई रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला कर ही लिया. यह फैसला उस समय हुआ है, जब विपक्षी लहर को मोड़ने के लिए माकपा उठ खड़ी हुई है, जिसे...

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 9

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 9

शाहआलम राहत शिविर में यह कथा स़िर्फ खालिद की ही नहीं है. यहां रहने वाले हर आदमी की कहानी कुछ ऐसी है कि जानने वाले लोगों की नींद उड़ जाए. शिविर में कोई भी मर्द औरत साबुत नहीं है. किसी...

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 8

पुस्‍तक अंश: मुन्‍नी मोबाइल- 8

दंगों के दौरान ही आनंद भारती का शिमला के बाद दूसरी बार नरेंद्र मोदी से आमना-सामना अहमदाबाद के सर्किट हाउस में हुआ. मौक़ा था प्रेस कांफ्रेंस का. मोदी ने हाल में घुसने के बाद जब पत्रकारों पर नज़र दौड़ाई तो...

पुस्तक अंश : मुन्नी मोबाइल- 7

पुस्तक अंश : मुन्नी मोबाइल- 7

दंगे गुजरात की क़िस्मत बन गए थे. जगह जगह राहत शिविरों की फसल उग आई थी. राहत शिविरों में भी लोग महफूज़ नहीं थे. दंगाई राहत शिविरों को भी निशाना बना रहे थे. जूहापुरा और गुप्ता नगर कालोनी के बीच...

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 6

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 6

गुजरात का मीडिया दो भागों में बंट गया था. एक दंगों के ग़ुनहगारों की पहचान कर रहा था, तो दूसरा दंगाइयों की हौसलाअफजाई करने में मशगूल था. मीडिया का यह हिस्सा आग में घी डालने का काम पूरी शिद्दत से...

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 5

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 5

अहमदाबाद में पाकिस्तान के नाम से पहचाना जाने वाला जुहापुरा इलाक़ा था. उस इलाक़े में रहने वाले बिल्डर और पोलिटीशियन सगीर अहमद से लतीफ ने प्रोटेक्शन मनी की मांग की.

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 4

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 4

हिंदू इलाक़ों में कर्फ्यू के बाद भी जनजीवन सामान्य था. मैकडॉनाल्ड्‌स, डॉमिनो, यूएस पिज्जास और मल्टीप्लेक्सों में देर रात तक लोग मौज़मस्ती में जुटे थे.

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 3

पुस्तक अंश: मुन्नी मोबाइल- 3

एक प्रचारक की इस इच्छा को जानकर उन्हें लगा कि वे संघ परिवार की निष्ठाओं से बंधे नहीं हैं. भविष्य में राजनीति ही उनका रास्ता है. यह बात दीगर है कि संघ परिवार के पूर्व सरसंघ चालक उर्फ गुरुजी राजनीति...

ग्रामीण संस्कृति की झलक नाबार्ड हाट में दिखी

ग्रामीण संस्कृति की झलक नाबार्ड हाट में दिखी

गांधी जी बड़े उद्योगों के विकास में नहीं, बल्कि लघु एवं हस्तशिल्प के विकास में विश्वास रखते थे. उनका मानना था कि छोटे उद्योगों के विकास से ही गांव में समृद्धि आ सकती है, लेकिन यह दुख की बात है...

मुस्लिम आरक्षण का भविष्य?

मुस्लिम आरक्षण का भविष्य?

मुसलमानों और ईसाइयों के आरक्षण के मुद्दे पर हर पार्टी में भ्रम की स्थिति है. इसमें कई पेंच हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें आरक्षण किस कोटे से दिया जाएगा?

मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ सुनिए

मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ सुनिए

यह पूरी तरह से मेरे और अल्लाह के बीच की बात है. इस मामले में मैं किसी भी बिचौलिए को नहीं जानती. क्या इस्लाम न्याय, समानता, दयाभाव और मानवता का धर्म नहीं है? किसी एक को अधिकार देकर दूसरे को...

नैनो नहीं तो रेल ही सही

नैनो नहीं तो रेल ही सही

सिंगुर एक बार फिर सुर्खियों में है. बंगाल की सबसे बड़ी घटना से झुलसे सिंगुर के दिन फिरने वाले हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में टाटा की नैनो फैक्ट्री के गुजरात चले जाने से वाममोर्चा को जिस राजनीतिक लाभ की उम्मीद...

‘परदेस’ जाने की मजबूरी खत्म

‘परदेस’ जाने की मजबूरी खत्म

उदारीकरण के बाद आज जब ग्रामीण उद्योग-धंधे चौपट होते जा रहे हैं और कृषि भी संकट के दौर से गुज़र रही हो तो ग्रामीण बेरोज़गारों का शहरों की ओर पलायन एक स्वाभाविक सी बात हो जाती है, लेकिन गुजरात के...

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