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Tag: मज़दूर

जानें क्यों ऋतिक रोशन ने हॉट कैटरीना को कहा ‘मजदूर’

जानें क्यों ऋतिक रोशन ने हॉट कैटरीना को कहा ‘मजदूर’

बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन ने खूबसूरत और हॉट अभिनेत्री कैटरीना कैफ को ‘मजदूर’ कहा है. ऋतिक का कहना है कि ऐसा कहकर उन्होंने कैटरीना की तारीफ की है और उनका इरादा बिल्कुल नेक है, हालांकि कैटरीना हमेशा ही इसे एक...

गुजरात में हो रहा ऐसा विकास कि मजदूर भाग रहे राज्य  छोड़कर!

गुजरात में हो रहा ऐसा विकास कि मजदूर भाग रहे राज्य छोड़कर!

कई साल तक गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहे पीएम मोदी ने अपने ही राज्‍य में विकास की ऐसी नींव रखी है कि वहां दूसरे प्रांतों से आकर काम कर रहे मजदूरों को वहां से भागने पर मजबूर होना पड़ रहा है....

लोक के खिलाफ तंत्र का मारक मंत्र

लोक के खिलाफ तंत्र का मारक मंत्र

अपने हक़ की आवाज़ लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हर भारतीय को यक़ीन होता है कि जंतर-मंतर से संसद तक सीधे आवाज़ पहुंचाई जा सकती है. लेकिन हृदयहीन सत्ता जनता की आवाज़ को पर्यावरण का नुक़सान समझती है. कई सफल आंदोलनों...

ऐसे एनजीओ जनांदोलनों के लिए ख़तरा हैं

ऐसे एनजीओ जनांदोलनों के लिए ख़तरा हैं

इस देश में ग़ैर सरकारी संगठनों के बारे में जितनी चर्चाएं होनी चाहिए, अफ़सोस! उतनी नहीं हो रही हैं. क्या एनजीओ को शामिल किए बग़ैर आंदोलन सफल नहीं हो सकता? क्या आंदोलनों को नुक़सान पहुंचाने में एनजीओ की कोई भूमिका...

सत्ता दमन और शोषण का साधन बन गई है

हमारा देश आज जिस विषम परिस्थिति से गुज़र रहा है, वह हर जागरूक नागरिक के लिए चिंता का विषय है. देश की आज़ादी ने स्वाभाविक ही लोगों के मन में यह आशा जगाई थी कि अब ग़रीबी और शोषण समाप्त...

उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

उड़ीसा ने अन्‍ना हजारे को सिर-आंखों पर बैठाया : राजनीति को नए नेतृत्‍व की जरूरत है

अन्ना हजारे कार्यकर्ता सम्मेलन में शिरकत करने के लिए उड़ीसा दौरे पर गए. उनकी अगवानी करने के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर हज़ारों लोग मौजूद थे, जो अन्ना हजारे जिंदाबाद, भ्रष्टाचार हटाओ और उड़ीसा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के...

सरकार जवाब दे यह देश किसका है

सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस...

श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

मध्य प्रदेश का कटनी ज़िला भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण बेशक़ीमती खनिज संपदा के प्रचुर भंडारण सहित जल संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अपने...

दुष्टतापूर्ण नीति

दुष्टतापूर्ण नीति

भारत में तो एक तरह से यह स्थिति आ गई है कि शासन को भारतीय राष्ट्रीय मज़दूर संघ ही चला रहा है. कोई भी काम हो, अगर उसके अधिकारीगण कराना चाहेंगे तो फौरन हो जाएगा, चाहे वह काम क़ानूनन वैध...

नवीनीकरण का विरोध

नवीनीकरण का विरोध

नई मशीनरी का परिणाम है कम मज़दूरों से अधिक काम करवा सकना. उससे मज़दूरों की ज़रूरत न रहने से कटौती या छंटनी होती है. जो लोग बेकार होते हैं, वे कभी भी नहीं चाहेंगे कि नई मशीनरी लगाई जाए. जो...

वर्ग तंत्र और यथास्थितिवाद

वर्ग तंत्र और यथास्थितिवाद

पांचवीं योजना वर्ग विभाजन की है. राष्ट्र को या समाज को कई वर्गों में विभक्त मान लिया जाता है और प्राय: हर एक वर्ग की अलग-अलग आय निर्धारित होती है. मान लीजिए, एक वर्ग निम्न कोटि के काम करने वाले...

जिसकी लाठी उसकी भैंस

जिसकी लाठी उसकी भैंस

तीसरी योजना है कि जिसके पास ताक़त हो, वह ले ले. जो संभाल सके, वह रखे. यदि यह कार्यान्वित हुई तो विश्व में कहीं भी शांति या सुरक्षा का नामोनिशान ही नहीं रहेगा. अगर सब ताक़त में या चालाकी में...

किसान आंदोलन चौथी दुनिया और सुप्रीम कोर्ट

किसान आंदोलन चौथी दुनिया और सुप्रीम कोर्ट

वर्तमान हालात में जन सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का स्वरूप क्या हो सकता है? इसकी एक मिसाल चौथी दुनिया की उन रिपोर्टों में देखने को मिलती है, जो देश भर में चल रही जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई से...

जो जितने का पात्र है, उतना उसे क्यों न मिले

जो जितने का पात्र है, उतना उसे क्यों न मिले

दूसरी योजना है कि हर एक को उतना मिले, जितने का वह पात्र है. बहुत से व्यक्ति, ख़ासकर जो आराम से हैं, कहते हैं और समझते हैं कि यही ठीक है. जो जितने का पात्र है, उतना उनको मिलता है,...

मांग के मुताबिक़ मूल्य

मांग के मुताबिक़ मूल्य

पहली योजना है कि हर आदमी जितना वह उपार्जन करे, अपनी मेहनत से पैदा करे, उतना पाए. यह योजना देखने में बड़ी उचित और सुंदर प्रतीत होती है, पर जब इसे कार्यरूप में परिणित करना चाहें तो बड़ी कठिनाइयां पेश...

मध्‍य प्रदेशः वेलस्‍पन कंपनी का कारनामा- देश में कितने और सिंगुर बनेंगे

मध्‍य प्रदेशः वेलस्‍पन कंपनी का कारनामा- देश में कितने और सिंगुर बनेंगे

विकास के नाम पर आ़खिर कब तक किसानों और मज़दूरों को उनके हक़ से वंचित किया जाएगा? सेज, नंदीग्राम, सिंगुर, जैतापुर, फेहरिस्त लंबी है और लगातार लंबी होती जा रही है. इसी क़डी में एक और नाम जु़ड गया है...

संपत्ति के वितरण की विभिन्न प्रणालियां

संपत्ति के वितरण की विभिन्न प्रणालियां

एक योजना जो आमतौर पर बतलाई जाती है और जो काम करने वाले मज़दूरों को मान्य और प्रिय है वह यह है कि जो आदमी अपने परिश्रम से जितना द्रव्य कमाए या पैदा करे वह उसके पास रहने दिया जाए....

बजट 2011 इसमें गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है

बजट 2011 इसमें गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है

प्रणब मुखर्जी के बजट में दबे-कुचलों, ग़रीबों, अल्पसंख्यकों, मज़दूरों, महिलाओं, बच्चों और किसानों के लिए धेले भर की जगह नहीं दिखाई पड़ती. बहुत पहले ही देश में बजट का स्वरूप बदल गया था. आज स्थिति यह है कि बजट सरकार...

पूरब न जइयो सइयां, चाकरी नहीं हैः औद्योगिक बदहाली से प्रवासियों का बुरा हाल

पूरब न जइयो सइयां, चाकरी नहीं हैः औद्योगिक बदहाली से प्रवासियों का बुरा हाल

यह दौर था 30-40 साल पहले का, जब बिहार-उत्तर प्रदेश में महेंद्र मिश्र की यह पूरबी ख़ूब गाई जाती थी. नाच या नौटंकी में इस तरह के गाने चलते थे. उस जमाने में कमाई के लिए पूरब का क्रेज़ था...

राष्‍ट्रमंडल खेलः सिर्फ पैसे की घपलेबाजी ही नहीं यह इंसानियत पर काला धब्‍बा है

राष्‍ट्रमंडल खेलः सिर्फ पैसे की घपलेबाजी ही नहीं यह इंसानियत पर काला धब्‍बा है

भारत आज विश्व की एक उभरती महाशक्तिहै. इसलिए अगर यहां राष्ट्रमंडल खेल हो रहे हैं तो यह ख़ुशी और गर्व की बात है, लेकिन सवाल है कि इस खेल के पीछे जो खेल चल रहा है, वह कितना जायज़ है?...

मनरेगा : का़फी गुंजाइश है सुधार की

मनरेगा : का़फी गुंजाइश है सुधार की

मनरेगा के तहत काम के दौरान मज़दूरों को मिलने वाली सुविधाएं संदेह के घेरे में हैं. योजना में इन सुविधाओं से संबंधित स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इनका कहां तक पालन किया जाता है, यह संदेहास्पद है. योजना...

मियो किसानों का विद्रोह और तबलीगी जमात

मियो किसानों का विद्रोह और तबलीगी जमात

वर्ष 1910 के अंत तक मेवात के मियो बहुल ग्रामीण इलाक़ों में कृषकों की समस्याएं अपने चरम पर पहुंच चुकी थीं. इसके साथ-साथ मियो समुदाय के अंदर शिक्षित लोगों का एक नया तबका भी तैयार हो चुका था, जो खेतिहर...

श्रमिकों के लिए केवल तीन प्रतिशत कल्‍याण राशि उपलब्‍ध

श्रमिकों के लिए केवल तीन प्रतिशत कल्‍याण राशि उपलब्‍ध

श्रमिकों के कल्याण के लिए उपलब्ध फंड का उपयोग नहीं किया जा रहा है. जो राशि इनके कल्याण के लिए आती है वह किसी और की जेब में जा रही है और यह सब इसलिए क्योंकि राज्य सरकार ने उसके...

अब पेंशन की टेंशन नहीं

अब पेंशन की टेंशन नहीं

बिहार के जमालपुर से आर के निराला ने हमें पत्र के माध्यम से दो मामलों के बारे में सूचित किया है. दोनों मामले नगर परिषद जमालपुर से संबंधित हैं. पहला मामला चंपा देवी का है. चंपा देवी नगर परिषद जमालपुर...

नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

हताशा ने न जाने कितनी जानें ली हैं, पर अभी हाल में इसने एक ऐसे नेता को अपना शिकार बनाया है, जिसने आज से 43 साल पहले हथियारों के बल पर उस व्यवस्था को बदलने का सपना देखा था, जो...

ममता दीदी, जरा नज़र इधर भी डालें

ममता दीदी, जरा नज़र इधर भी डालें

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाली भारतीय रेल में कल्याणकारी योजना के तहत कई अर्द्धसरकारी संस्थाएं चलाई जाती है जिनमें रेलवे मनोरंजन संस्थान, कैंटीन, को-ऑपरेटिव, सिलाई सेंटर, आर्युवेदिक एवं होम्योपैथिक स्वास्थ्य केंद्र आदि हैं. इन संस्थानों में हज़ारों श्रमिक...

महिला और बाल व्यापार आदिवासी बालिकाओं की तस्‍करी

महिला और बाल व्यापार आदिवासी बालिकाओं की तस्‍करी

मध्य प्रदेश के बालाघाट, छिन्दवाड़ा, मण्डला, डिण्डौरी आदि आदिवासी जनसंख्या बहुल ज़िलों में आए दिन आदिवासी बालिकाओं के अचानक ग़ायब हो जाने की खबरें अब सामान्य घटना हो गई हैं. पुलिस ज़्यादातर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज़ नहीं करती और मजबूरी...

चटकलिया मज़दूरों पर लटका जूट का फंदा

चटकलिया मज़दूरों पर लटका जूट का फंदा

कोलकाता के पास टीटागढ़ के जूट मिल मज़दूर शाम को चौपाल में जब लोक गायिका प्रतिभा सिंह का यह गीत गाते हैं तो माहौल गमगीन हो जाता है. ढोलक की थाप और झाल की झनकार में सिसकते आंसुओं की आवाज़...

मजदूरों की रोज़ी—रोजी छीनी

मजदूरों की रोज़ी—रोजी छीनी

कहते हैं, पेट की भूख इंसान से कुछ भी करा सकती है. इसी के चलते कुछ लोग वतन बदर होकर परदेश में रोजी-रोटी की तलाश करते हैं. घर छोड़ अपनों से दूर रहकर कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी और झमाझम...

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