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Tag: सरकार

ज्वाइंट वेंचर के नाम पर एक और कोयला घोटाला

ज्वाइंट वेंचर के नाम पर एक और कोयला घोटाला

मान लीजिए, आप दावत देना चाहते हैं, उसके लिए राशन एवं अन्य आवश्यक सामान खरीद कर लाते हैं, बावर्ची को बुलाते हैं और उससे भोजन तैयार करने को कहते है. इस काम के बदले बावर्ची आपसे एक तयशुदा रकम लेता...

पूर्वोत्तर की गांधी इरोम शर्मिला

पूर्वोत्तर की गांधी इरोम शर्मिला

मणिपुर में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (अफ्सपा) हटाने की मांग को लेकर पिछले 14 वर्षों से भूख हड़ताल कर रहीं इरोम शर्मिला को मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिहा तो किया गया, लेकिन दूसरे ही दिन आत्महत्या की...

आईएसआईएस के ख़िलाफ़ आर-पार की लड़ाई क्यों नहीं?

आईएसआईएस के ख़िलाफ़ आर-पार की लड़ाई क्यों नहीं?

आईएसआईएस (दाइश) ने जून 2014 में इराक के उत्तरी हिस्से में संप्रभुता की घोषणा की थी और अबुबकर अल बग़दादी नाम के एक व्यक्ति को नई सल्तनत का अमीर इल मोमीनीन नियुक्त किया था. इराक सरकार ने दाइश पर सैन्य...

संकट में नवाज़ सरकार

संकट में नवाज़ सरकार

कभी क्रिकेट के मैदान पर जलवा दिखाकर पाकिस्तान को विश्‍व चैंपियन बनाने वाले इमरान ख़ान और मौलाना ताहिर उल क़ादरी इन दिनों नवाज़ शरीफ़ सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं. जब से नवाज़ शरीफ़ की पार्टी चुनाव...

कॉलेजियम सिस्टम ग़लत है

कॉलेजियम सिस्टम ग़लत है

यह सरकार 93 से पूर्व की स्थिति में जाना चाहती है. न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा निर्णय लेकर हो. दुनिया में कहीं भी जज की नियुक्ति कोई जज नहीं करता. जजों की नियुक्ति में चेक एंड बैलेंस भी होना चाहिए....

…फिर भी सियासत को शर्म नहीं आती

…फिर भी सियासत को शर्म नहीं आती

मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर खूब सियासत हुई. उत्तर प्रदेश सरकार, समाजवादी पार्टी, पूर्ववर्ती केंद्र सरकार और उसकी सूत्रधार कांग्रेस ने स्वयं को मुसलमानों का हितैषी दर्शाने की सारी हदें लांघीं, लेकिन साबित यही हुआ कि आम नागरिक कभी किसी सत्ता...

यह सक्रियता आपराधिक थी

यह सक्रियता आपराधिक थी

बिहार के लिए अगस्त के शुरुआती तीन दिन बड़े ही त्रासदपूर्ण रहे. सूबे में वे दिन कोशी में जल-प्रलय की आशंका के बीच गुजरे. नेपाल के सिंधुपाल चक ज़िले में भू-स्खलन के कारण सनकोसी नदी पर झील बन जाने से...

दिल्ली का बाबू : बाबू बेचारा, काम का मारा

दिल्ली का बाबू : बाबू बेचारा, काम का मारा

हिमाचल प्रदेश कैडर के कम से कम 26 अधिकारी वर्तमान में प्रदेश के बाहर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अथवा अन्य नियुक्तियों पर हैं. इस वजह से राज्य की नौकरशाही कमजोर हो गई है. कुछ नौकरशाह तो साफ़ तौर पर काम के बोझ...

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी-भरकम जीत के साथ ही यह तय हो गया था कि अब देश में इतिहास को लेकर विवाद उठेगा. भारतीय जनता पार्टी की सरकार इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करेगी, जिसका...

मध्य प्रदेश: रामराज या भ्रष्टराज

मध्य प्रदेश: रामराज या भ्रष्टराज

मध्य प्रदेश देश का एक ऐसा राज्य है, जहां से लगातार लोकायुक्त की टीम द्वारा सरकारी कर्मचारियों के यहां छापे मारने की ख़बरें आती रहती हैं और चपरासी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के पास करोड़ों-अरबों की संपत्ति होने का...

हिंदू राष्ट्र में हो समग्र भारत

हिंदू राष्ट्र में हो समग्र भारत

दक्षिण भारत का मुसलमानों के साथ अनुभव व्यापारिक तौर पर रहा. उन्होंने मुलसमानों के साथ व्यापार का अनुभव लिया, न कि मुस्लिम शासन का. मुस्लिम शासन काफी बाद में वहां पहुंचा. इसी प्रकार किसी भी तरह के हिंदू इतिहास को...

महाभारत पर वैचारिक महाभारत

महाभारत पर वैचारिक महाभारत

डॉक्टर जेम्स अशर बाइबिल के विद्वान थे. जेनेसिस के अध्यायों के अध्ययन के दौरान गणना करके वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ईश्‍वर ने दुनिया की रचना 4004 बीसी में की थी. वह बाइबिल की गणना के अनुसार तो सही...

सरकार की कार्य प्रणाली अस्पष्ट है

सरकार की कार्य प्रणाली अस्पष्ट है

यह सरकार जिस तरी़के से काम कर रही है, वह एक मिश्रित संकेत दे रहा है. कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं दिख रही है. यह पता नहीं चल पा रहा है कि आख़िर वे करने क्या जा रहे हैं. यह भी...

नहीं खत्म हुआ बरौनी खाद कारखाने का इंतजार

नहीं खत्म हुआ बरौनी खाद कारखाने का इंतजार

रेल बजट की तरह ही आम बजट ने भी बेगूसराय को निराश किया है. जिलावासियों को उम्मीद थी कि आम बजट में बेगूसराय के विकास के लिए कुछ न कुछ प्रावधान अवश्य किया जाएगा. लेकिन पिछली सरकारों की तरह मोदी...

आम बजट और स्वास्थ्य जो वादा किया, वह निभाना पड़ेगा

आम बजट और स्वास्थ्य जो वादा किया, वह निभाना पड़ेगा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2014-15 का आम बजट पेश कर दिया. बतौर वित्त मंत्री यह उनका और उनकी सरकार का पहला बजट है. लोगों ने भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस उम्मीद के साथ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक...

अमीरों का रेल बजट

अमीरों का रेल बजट

मोदी सरकार के गठन के बाद अच्छे दिनों की आस लगाए बैठे लोगों ने सोचा था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उनके दिन बहुर जाएंगे. सरकारी महकमों, खासकर रेलवे की हालत सुधर जाएगी. लोगों को रेल के जनरल...

बजट निर्माण में जन-सहभागिता ज़रूरी

बजट निर्माण में जन-सहभागिता ज़रूरी

बजट एक जटिल विषय है. बजट कैसे बनता है, इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है, इन सब चीजों से सामान्य लोगों का कोई रिश्ता नहीं है. शायद यही वजह भी है कि आम आदमी के लिए बजट एक नीरस एवं उबाऊ...

यह अमीरों का बजट है,जनता का नहीं

यह अमीरों का बजट है,जनता का नहीं

श्री नरेंद्र मोदी की पांच साल चलने वाली सरकार का पहला बजट सामने आ गया. जब रेल के किराये में 14.20 प्रतिशत की वृद्धि बजट का इंतज़ार किए बिना की गई थी, तब हमें लगा था कि शायद बजट इससे भिन्न...

अच्छे दिनों का मतलब क्या है?

अच्छे दिनों का मतलब क्या है?

आख़िर सौ दिनों का एजेंडा क्या है? प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने अपने सभी मंत्रियों से कहा था कि वे उन्हें एक प्रेजेंटेशन दें और उसमें बताएं कि सौ दिनों के भीतर वे क्या-क्या करने वाले हैं और किस...

नहीं मिल रहे पटना और दिल्ली के सुर

नहीं मिल रहे पटना और दिल्ली के सुर

चुनाव के वक्त यह अक्सर कहा जाता है कि दिल्ली में जिसकी सरकार हो, अपने यहां भी वही सरकार चुनिए, ताकि केंद्र और राज्य में बेहतर तालमेल बना रहे और सूबे का विकास हो सके. बहुत हद तक यह आजमाया...

गलत नीतियों ने बढ़ाई महंगाई

गलत नीतियों ने बढ़ाई महंगाई

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महंगाई पर काबू न कर पाने को यूपीए सरकार की सबसे बड़ी असफलता बताया था. उनके कार्यकाल में लगातार बढ़ती महंगाई सरकार की कुनीतियों का सामूहिक परिणाम थी. परस्पर विरोधी नीतियों और उनके लक्ष्यों में...

क्योँ पड़ती है महंगाई की मार

क्योँ पड़ती है महंगाई की मार

थोक मूल्य सूचकांक में वृद्धि के ताजा आंकड़ों ने मोदी सरकार की परेशानी बढ़ा दी है. मई माह में थोक महंगाई दर में 6.01 फ़ीसद की वृद्धि दर्ज की गई, जो दिसंबर के बाद दर्ज की गई सबसे ज़्यादा महंगाई...

दिल्ली का बाबू : अंदरूनी कलह की मार

दिल्ली का बाबू : अंदरूनी कलह की मार

केरल के बाबू समाज में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. प्रदेश के आईएएस अधिकारियों के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिल रही है और उन्होंने इस आपसी लड़ाई में मुख्यमंत्री ओमान चांडी को भी खींच लिया है. इस...

बाज़ार तय कर रहा है आवश्यक दवाओं के दाम

बाज़ार तय कर रहा है आवश्यक दवाओं के दाम

देश में उदारीकरण के बाद स्वास्थ्य सुविधाएं आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर हो गई हैं. कोई आम आदमी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज कराने का सपना भी नहीं देख सकता है. विकल्प सरकारी अस्पताल हैं. लेकिन, जब ज़रूरी...

प्रधानमंत्री जी, यह परीक्षा की घड़ी है

प्रधानमंत्री जी, यह परीक्षा की घड़ी है

उर्दू का एक शेर है, उसे अपनी तरह से कहने की कोशिश करते हैं, किस-किस पे खाक डालिए, किस-किस पे रोइए, आराम बड़ी चीज है, मुंह ढंक के सोइए. सचमुच मुंह ढंक के सोने की ख्वाहिश हो रही है. कांग्रेस...

सरकार के सामने चुनौतियां

सरकार के सामने चुनौतियां

एक बार पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैरॉल्ड मैकमिलन से यह पूछा गया कि वह किस बात को लेकर सबसे ज़्यादा चिंतित होते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया था, अवांछित घटनाएं मेरे दोस्त. भारत में नई सरकार बने अभी ज़्यादा दिन नहीं...

निम्न-मध्यम वर्ग को राहत मिलनी चाहिए

निम्न-मध्यम वर्ग को राहत मिलनी चाहिए

बजट में करदाताओं के लिए कुछ राहत के संकेत मिल रहे हैं. लेकिन किस तरह की राहत? आप वास्तव में राहत देना चाहते हैं, तो निम्न-मध्यम वर्ग, जो पहले से ही महंगाई के बोझ से दबा है, को कराधान से...

नेचुरल गैस प्राइसिंग: एक धूर्त राजनीति  का नमूना है

नेचुरल गैस प्राइसिंग: एक धूर्त राजनीति का नमूना है

नेचुरल गैस की क़ीमत में दोगुनी वृद्धि इस तरीके से की गई है, जिसे समझना आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन है. क्योंकि, यहां क़ीमत का संबंध गैस से है और द्रव से भी है. यहां गैस के द्रव बनते...

अनोखे आविष्कार, जिन्हे नहीं मिली पहचान

अनोखे आविष्कार, जिन्हे नहीं मिली पहचान

भारत में अनेक ऐसे आविष्कार हुए हैं, जो क्रांति ला सकते हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण उन्हें पहचान नहीं मिली. ऐसे आविष्कारों को सरकार मान्यता देने से भी कतराती हैं. देश में कई आविष्कारकों ने ऊर्जा के क्षेत्र...

एफडीआई से क्या असर पड़ेगा

एफडीआई से क्या असर पड़ेगा

रक्षा के बाद कृषि की बात करें, तो भारत में कृषि सबसे अधिक रा़ेजगार देने वाला क्षेत्र माना जाता है. कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान क़रीब 16.6 फ़ीसद है. देश में लगभग 12.5 करोड़ किसान हैं,...

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