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Tag: क़ानून

पुलिस थाने में आत्मसमर्पण करने आये युवक को दबंगो ने पुलिस के सामने मारी गोली, हालत गंभीर

पुलिस थाने में आत्मसमर्पण करने आये युवक को दबंगो ने पुलिस के सामने मारी गोली, हालत गंभीर

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में दबंग इतने बेख़ौफ़ हैं, कि उन्हें पुलिस से भी डर नहीं लगता। वो जब चाहें जिसे चाहें गोली मार सकते हैं। ताज़ा मामला शाहजहांपुर ज़िले के थाना जलालाबाद के पास का है। जहां दबंगों ने...

दलितों से किसे डर लगता है

दलितों से किसे डर लगता है

शायद ही कोई ऐसा चुनावी मंच हो जहां से प्रधानमंत्री मोदी ने सबका साथ सबका विकास और संविधान को ग्रन्थ मानने की बात नहीं की हो, लेकिन अफ़सोस कि मंचों से कहे जाने वाले ये नारे धरातल पर नहीं उतर...

हमें हर रोज दाना मांझी देखने पड़ते हैं….

हमें हर रोज दाना मांझी देखने पड़ते हैं….

निरंजन : तिरुचिरापल्ली से आईं वी राजलक्ष्मी भी तमिलनाडु के उन 100 किसानों में शामिल हैं, जो जंतर मंतर पर अपनी कई मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं. वे कहती हैं कि हमारी बात ना सरकार सुन रही है...

खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर त्राहि-त्राहि कर रही है. प्रदेश में स्वास्थ्य का मुद्दा अत्यंत गंभीर है. इन दिनों समूचा प्रदेश...

अल्पसंख्यकों के हितों और सुरक्षा पर गंभीर बहस

अल्पसंख्यकों के हितों और सुरक्षा पर गंभीर बहस

इट इज बेटर टू बी अन-पॉपुलर दैन टू बी अन-ट्रूथफुल यानी झूठ बोलने से बेहतर है, अलोकप्रिय होना. यह अंतिम पंक्ति थी उस शख्सियत के भाषण की, जिसे देश-दुनिया भर में विधि विशेषज्ञ और क़ानून के प्रकांड विद्वान के रूप...

विदेशी फंड से संचालित गैर सरकारी संगठन देश के लिए खतरा है

विदेशी फंड से संचालित गैर सरकारी संगठन देश के लिए खतरा है

सरकार की रिपोर्ट आई है कि विदेशी धन से चलने वाले देशी एनजीओ भारत के आर्थिक विकास के लिए ख़तरा हैं. विकास की परिभाषा क्या है, विकास का सही रास्ता क्या है, विकास के लिए सही नीतियां क्या हैं, यह...

मैं भी मुंह में ज़ुबान रखता हूं…

मैं भी मुंह में ज़ुबान रखता हूं…

जितने अजीब भैय्या हैं, उतने ही विचित्र उनके सवाल. वह पूछते हैं कि चुनाव के ही मौसम में नेता लोग एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में क्यों जाते हैं? अजीब सवाल है भाई! अब इस मौसम में नहीं जाएंगे, तो...

अधर में लटके  महत्वपूर्ण  विधेयक

अधर में लटके महत्वपूर्ण विधेयक

लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद देश की करोड़ों जनता का प्रतिनिधित्व करती है. सदन की शोभा सांसदों से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और आचरण से बढ़ती है. इसे पंद्रहवीं लोकसभा के सत्र का स्याह पक्ष ही कहा जाएगा कि...

सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण आपका अधिकार है

सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण आपका अधिकार है

आरटीआई क़ानून में कई प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था है. निरीक्षण का मतलब है कि आप किसी भी सरकारी विभाग की फाइल अथवा किसी भी विभाग द्वारा कराए गए काम का निरीक्षण कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आपके...

चुनावी पिच पर सौगातों की बैटिंग

चुनावी पिच पर सौगातों की बैटिंग

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार आम चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पूर्व अपने सभी मोर्चे दुरुस्त कर लेना चाहती है, ताकि चुनावी मैदान में जनता के सामने समाजवादी पार्टी के पक्ष में मजबूती के साथ पेशबंदी की...

कब होगी न्यायालय की अवमानना?

कब होगी न्यायालय की अवमानना?

पिछले अंक में हमने आपको आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि आपको लोक सूचना अधिकारी की तरफ से ऐसा जवाब मिले कि तीसरे पक्ष से जुड़े होने के कारण आपको अमुक...

सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती

सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी, चारों तरफ़ फैली गंदगी के बारे में सोच कर आम...

यह संसद संविधान विरोधी है

यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और...

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़...

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में, श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली. विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष...

मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी...

किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

किसानों पर गोलियां चलाने से हल नहीं निकलेगा

भारत भी अजीब देश है. यहां कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए सरकार सारे दरवाज़े खोल देती है. कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए नियम-क़ानून भी बदल दिए जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी...

48  लाख करोड़ का महाघोटाला

48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला...

एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा...

फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसके सही अर्थ में शायद नहीं लें. इसलिए भी लिखने...

जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्याग्रह मार्च ग्वालियर से 3 अक्टूबर को शुरू हुआ. योजना के मुताबिक़, क़रीब एक लाख किसान ग्वालियर से चलकर दिल्ली पहुंचने वाले थे. इस मार्च में शामिल होने वालों में सभी जाति-संप्रदाय के अदिवासी, भूमिहीन एवं ग़रीब किसान थे....

सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उसी सूबे की पंचायतों और ग्राम सभाओं की उपेक्षा होना यह साबित करता...

बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे...

निगाहें भ्रष्‍टाचार पर, निशाना 2014

निगाहें भ्रष्‍टाचार पर, निशाना 2014

अरविंद केजरीवाल और टीम अन्ना के बाक़ी सदस्य जब जुलाई 2012 के अनशन के लिए मांगों की लिस्ट तैयार कर रहे होंगे, तब उन्हें भी यह अहसास रहा होगा कि वे असल में क्या मांग रहे हैं? 15 दाग़ी मंत्रियों...

अन्ना और रामदेव की वजह से आशाएं जगी हैं

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे लोगों को सावधान हो जाना चाहिए. इतने दिनों के बाद भी उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन-सा सवाल उठाना चाहिए और कौन-सा नहीं. एक वक़्त आता है, जिसे अंग्रेजी में...

आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद...

भारतीय जल नीति के खतरे

भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक...

असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है....

प्रथम अपील कब और कैसे करें

प्रथम अपील कब और कैसे करें

आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है. ऐसी स्थिति में अपील एवं शिकायत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता.

यूपीए-2 के तीन साल : सत्ता के संवेदनहीन होने की कहानी

यूपीए-2 के तीन साल : सत्ता के संवेदनहीन होने की कहानी

22 मई की रात. तीन साल पूरे होने के अवसर पर यूपीए-2 सरकार ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत सारे महत्वपूर्ण नेता इस पार्टी में शामिल थे. उसी दिन सुबह...

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