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Tag: freedom

मैला उठाने की प्रथा : स्वचछ भारत में ये अस्वच्छ तस्वीर कहां रखेंगे

मैला उठाने की प्रथा : स्वचछ भारत में ये अस्वच्छ तस्वीर कहां रखेंगे

सिर पर मैला ढोने या हाथ से मैला उठाने का घिनौना और अमानवीय कार्य आज भी हमारे देश में न सिर्फ जारी है बल्कि इस काम में लगे सफाई कर्मचारियों की असमय मौत भी हो रही है. ताज़ा घटना मध्य...

मोदी सरकार ने तीन साल में हटाए 1159 पुराने क़ानून : क़ानूनी किताब का ‘अंग्रेजी’ पाठ

मोदी सरकार ने तीन साल में हटाए 1159 पुराने क़ानून : क़ानूनी किताब का ‘अंग्रेजी’ पाठ

कानून की किताब में जितने नए अध्याय ज़ुडे हैं, उससे कहीं अधिक हटाए गए हैं. ये ब्रिटिशकालीन अध्याय कानूनी किताब में आर्काइव की तरह पड़े थे. प्रधानमंत्री मोदी ने तत्परता दिखाते हुए करीब बारह सौ पुराने कानूनों को एक झटके...

वनाधिकार कानून : जंगल का अधिकार जमीन पर उतरता ही नहीं

वनाधिकार कानून : जंगल का अधिकार जमीन पर उतरता ही नहीं

वन व अन्य प्राकृतिक संपदा पर आश्रित समुदायों के स्वतंत्र एवं पूर्ण अधिकार का विषय वनाधिकार आंदोलन में हमेशा से प्रमुख रहा है. अंग्रेज़ी राज के ज़माने में ही इन संपदाओं पर उपनिवेशिक शासकों ने पूरा कब्ज़ा जमा लिया. उन...

पहचान का संकट ही कश्मीर की समस्या है

पहचान का संकट ही कश्मीर की समस्या है

आज कश्मीरियों को इस बात की शिकायत है कि भारत में शायद ही किसी को यह पता हो कि कश्मीर का असल मसला क्या है़ भारत का मीडिया जिसे कश्मीर का मसला बताता है, वह कश्मीर का असल मसला है...

चलो गांव की ओर: एक अभियान

चलो गांव की ओर: एक अभियान

आजादी के बाद जिस अनुपात में महानगरों से लेकर छोटे-छोटे कस्बों का विकास हुआ उसी अनुपात में गांव पिछड़ता चला गया और शुरू हो गया गांव से शहरों की ओर पलायन का सिलसिला. फलस्वरूप गांव में खेती,पशुपालन और घरेलू उद्योग...

मंगल मिशन की कामयाबी

मंगल मिशन की कामयाबी

हमने यूजीसी को ब्रिटिश ढांचे से उठाया है, लेकिन स़िर्फ शब्दों में, आत्मा से नहीं. यूनिवर्सिटी को इस बात की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वे शिक्षकों को रख सकें और अपने हिसाब से शोध करा सकें. यह गुणवत्ता को बढ़ाता...

ग्रेट ब्रिटेन से इंग्लैंड की ओर

ग्रेट ब्रिटेन से इंग्लैंड की ओर

ब्रिटेन को समझ आ जाना चाहिए कि अब औपनिवेशिक समय का दुनिया से अंत हो चुका है. उससे जु़डे देश ही अब अलग होने की मांग कर रहे हैं. बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आने वाले समय में यूनाइटेड...

ख़तरे में पाकिस्तान का लोकतंत्र

ख़तरे में पाकिस्तान का लोकतंत्र

तालिबान के साथ कई साल तक अनिश्‍चितता के संबंधों में रहने के बाद पाकिस्तान ने आख़िरकार यह फैसला किया है कि तालिबान उसका दोस्त नहीं है, बल्कि वह सत्ता का दावेदार बनना चाहता है. तालिबान दोस्ती नहीं चाहता, बल्कि सत्ता...

अद्भुत अभिव्यक्ति और जिजीविषा का अनूठा दस्तावेज़

आत्मकथा-हमारे पत्र पढ़ना की लेखिका, कवयित्री एवं कथाकार उर्मिल सत्यभूषण का जन्म पंजाब के गुरुदासपुर ज़िले में बीसवीं शताब्दी के चौथे दशक में हुआ था. उस समय देश में अंग्रेजी हुकूमत थी. आज़ादी की लड़ाई देश के कोने-कोने में लड़ी...

न्यायिक सुधारों का समय आ गया हैं

न्यायिक सुधारों का समय आ गया हैं

बहुत तेज़ धूप में कोई भी अपनी छत की मरम्मत नहीं करता और न गर्मी के मौसम में बाढ़ राहत के उपाय करता है. गंभीर रूप से उपाय स़िर्फ तूफान के समय में किए जाते हैं. गंभीर उपाय करने की...

विदेश नीति में पड़ोसियों को वरीयता

विदेश नीति में पड़ोसियों को वरीयता

आज़ादी के बाद भारत की विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है. भारत की विदेश नीति एक सतत विदेश नीति रही है. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कहा जाने लगा था कि यूपीए सरकार...

हिंदी को मिले उसका हक़

हिंदी को मिले उसका हक़

आज़ादी के तक़रीबन दो दशक पहले 1928 के आसपास चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने लिखा था, जनता की भाषा एक और शासन की भाषा दूसरी होने से जनता संसद तथा विधानसभाओं के सदस्यों पर समुचित नियंत्रण नहीं रख सकेगी, इसलिए उचित यही...

कमज़ोर विपक्ष कितना कारगर

कमज़ोर विपक्ष कितना कारगर

राजनीतिक लोकतंत्र का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही पुराना है सरकार और विपक्ष के बीच का अंतर. भारत की बात करें, तो यहां की राजनीतिक प्रणाली में शुरू से ही एक सशक्त विपक्ष की परिकल्पना रही है. इसकी परंपरा...

आख़िर कैसे होगा देश का विकास

आख़िर कैसे होगा देश का विकास

संघ किस तरह भारत की जनता के जीवन में खुशहाली लाएगा यह देखने की चीज है. नरेंद्र मोदी को जो ढांचा मिला है, वह ढांचा भ्रष्टाचार के तरी़के तलाशने में तो माहिर है, लेकिन लोगों की ज़िंदगी में खुशहाली लाने...

मैं भी मुंह में ज़ुबान रखता हूं…

मैं भी मुंह में ज़ुबान रखता हूं…

जितने अजीब भैय्या हैं, उतने ही विचित्र उनके सवाल. वह पूछते हैं कि चुनाव के ही मौसम में नेता लोग एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में क्यों जाते हैं? अजीब सवाल है भाई! अब इस मौसम में नहीं जाएंगे, तो...

जिन्हें अपने ही देश में वोट देने का हक़ नहीं

जिन्हें अपने ही देश में वोट देने का हक़ नहीं

क्या मेघालय हिंदुस्तान का हिस्सा नहीं है? अगर यह सूबा इस देश का अंग है, तो मेघालय के क़रीब सात हज़ार लोगों को आज़ादी के 66 वर्षों बाद भी वोट देने का अधिकार क्यों नहीं है? आख़िर देश के बाकी...

नरेंद्र मोदी क्या सोचते हैं?

संघ परिवार ने हर तरफ़ हर्ष का माहौल तैयार कर रखा है. संघ का कहना है कि नरेंद्र मोदी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. संघ के इस दावे का कोई आधार नहीं है. यह बात इसलिए कही...

पुराने क़ानूनों में बदलाव की ज़रूरत

पुराने क़ानूनों में बदलाव की ज़रूरत

हाल में धारा 377, जो अप्राकृतिक सेक्स कोे दंडनीय अपराध मानती है, पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के लिए फिर से मुहर लगा दी. एलजीबीटी समुदाय के लोग और उनके दोस्त यह चाहते थे कि इसे बदल दिया जाए. दुष्कर्म...

…और घटता गया मुसलमानों का असर

…और घटता गया मुसलमानों का असर

आज 23 वर्षों बाद आवश्यकता महसूस होती है कि विश्‍लेषण किया जाए कि टैक्टिकल वोटिंग वास्तव में कितनी प्रभावी और लाभदायक रही? सामूहिक रूप से इस अनुभव ने मुसलमानों के राजनीतिक सशक्तिकरण में क्या भूमिका निभाई? क्या साधारण मुस्लिम मतदाता...

कौन बनेगा समलैंगिकों की राजनीतिक आवाज़?

समलैंगिक संबंधों की स्वतंत्रता को लेकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को इस निर्णय से दु:खी नहीं होना चाहिए और न ही क्रोधित. मैंने समलैंगिक अधिकारों को लेकर पचास वर्ष पूर्व इंग्लैंड में चले अभियानों को नजदीक से देखा है. मैं...

राष्ट्र की एकता को बचाइए

आज भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मुझे जो नितांत आवश्यकता प्रतीत होती है वह है लड़ाई की! लड़ाई किसके विरुद्ध? राष्ट्रीय जीवन में बढ़ती जा रही खंडता, विभाजन सभी क्षेत्रों में स्वार्थान्धता, मूल्यच्युति, दिशाहीन पथभ्रष्टता, अशुचिता के प्रति. सन 1920...

कॉल अन्ना को सफल बनाया बिग वी टेलीक़ॉम ने

कॉल अन्ना को सफल बनाया बिग वी टेलीक़ॉम ने

अन्ना हजारे द्वारा लड़ी गई जनलोकपाल की निर्णायक लड़ाई के दौरान समूचे देश को अन्ना से जोड़ने और उनके विचारों को सुनने के लिए कॉल अन्ना सुविधा ने भी निर्णायक भूमिका निभाई. कॉल अन्ना एक कॉल सेंटर है जिसके माध्यम...

दंगा पीड़ितों के पुर्नवास का संकट

दंगा पीड़ितों के पुर्नवास का संकट

आज़ादी के बाद से अब तक भारत में दंगों का लंबा इतिहास रहा है. पीड़ित अपने पैतृक निवासों से विस्थापित होते रहे हैं और कई बार वापस भी लौटते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में असम, गुजरात और पश्‍चिमी...

मंगल अभियान और आधुनिक भारत

कांग्रेस एक हथियार था जिसका इस्तेमाल महात्मा गांधी ने जनता के संघर्ष के लिए किया. लेकिन इसका इस्तेमाल उन्होंने अपने तानाशाही नियमों के तहत किया. कांग्रेसियों ने हमेशा गांधी का पालन किया लेकिन उनके नियमों का नहीं. कांग्रेसियों ने गांधी...

भ्रष्टाचारी सरकार का अधिनायकवाद

राष्ट्र के राजनैतिक संकट  का मूल कारण सत्ताधारी दल की अलोकतांत्रिक और सत्तावादी अकांक्षा है. वर्तमान सत्ता देश पर एक वंशगत अधिसत्ता लादने पर तुल गई है. संसदीय संस्थाओं की गरिमा और अधिसत्ता को क्षीण करके, न्यायपालिका की स्वतंत्रता को...

सामाजिक विसंगतियों का धर्मक्षेत्र

सामाजिक विसंगतियों का धर्मक्षेत्र

वर्तमान समय में हर व्यक्ति आगे बढ़ना चाहता है. आगे बढ़ने की इच्छा में वह कितना हासिल करेगा और कितना कुछ गवां देगा, इन सब के बारे में विश्‍लेषण करने का उसके पास समय नहीं है. आगे बढ़ने की इस...

लक्ष्‍मी सहगल : लड़ाई अब भी जारी है

लक्ष्‍मी सहगल : लड़ाई अब भी जारी है

कैप्टन लक्ष्मी सहगल कभी पहचान की मोहताज नहीं रहीं. उनकी ज़िंदगी का हर पड़ाव उनके राजनीतिक उदय की एक अप्रत्याशित कहानी कहता है. आज़ाद हिंद फौज में कैप्टन बनने से लेकर 2002 में राष्ट्रपति के चुनाव लड़ने तक वह भारतीय...

सरकार खिलाडि़यों से खेल रही है

सरकार खिलाडि़यों से खेल रही है

कुछ दिन पहले पान सिंह तोमर नाम की एक फिल्म आई थी. फिल्म के निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने खिलाड़ी से बाग़ी बनने की एक कहानी को रूपहले परदे पर दिखाया. हिमांशु ने इस फिल्म को उन खिलाड़ियों को समर्पित किया,...

इस बार सरकार ने गांधी को मारा

इस बार सरकार ने गांधी को मारा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खून से सनी घास एवं मिट्टी, उनका चश्मा और चरखा सहित उनसे जुड़ी 29 चीज़ें ब्रिटेन में नीलाम हो गईं और इस देश का दुर्भाग्य देखिए, सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया. इतना ही...

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