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Tag: poetry

अमिताभ ने कुमार विश्वास को थमाया नोटिस, चोरी करने का लगाया आरोप !

अमिताभ ने कुमार विश्वास को थमाया नोटिस, चोरी करने का लगाया आरोप !

नई दिल्ली। कुमार विश्वास का वक्त खराब चल रहा है पार्टी ने उन्हें लगभग दरकिनार कर दिया है और अब कविताओं को लेकर भी विवाद होने लगे हैं। विवाद भी छोटा मोटा नहीं उन्हें सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने...

जश्न-ए-रेख्ता : उर्दू पुनरुत्थान आंदोलन में मील का पत्थर है

जश्न-ए-रेख्ता : उर्दू पुनरुत्थान आंदोलन में मील का पत्थर है

उर्दू का जश्न मनाने के लिए आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-रेख्ता के समापन पर प्रतिभागी इतने प्रभावित हुए कि उन्हें लगा जैसे उर्दू के पुनरुत्थान का समय आ गया है. जश्न में पहुंचने वाले लोगों के सैलाब ने आयोजकों को भी...

मिथकीय चरित्रों का बोलबाला

मिथकीय चरित्रों का बोलबाला

एक तरफ जहां हिंदी साहित्य लेखन में एकरसता जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और लगभग एक ही ढर्रे पर कहानी, कविता और उपन्यास लिखे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजी में लिखने वाले भारतीय लेखकों ने विषयों की...

कविता के बाद कहानी पर नज़र

कविता के बाद कहानी पर नज़र

समकालीन साहित्यिक परिदृश्य में इस बात को लेकर सभी पीढ़ी के लेखकों में मतैक्य है कि कविता भारी मात्रा में लिखी जा रही है. यह हिंदी साहित्य का सौभाग्य है कि कुंवर नारायण और केदारनाथ सिंह जैसे बुजुर्ग कवि अब...

ज़मीं की प्यास में नदी की तलाश

ज़मीं की प्यास में नदी की तलाश

सचमुच में आज हम जिस परिवेश और यथार्थ में सांसें ले रहे हैं, वह पूरी तरह से कष्टदायी है. एक प्रबुद्ध ग़ज़लकार के नाते अशोक आलोक इस पीड़ा को अच्छी तरह समझते हैं और अपनी ग़ज़लों में बखूबी व्यक्त भी...

हाय हुसैन, हम न हुए!

हाय हुसैन, हम न हुए!

छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन दिनों का रायपुर साहित्य महोत्सव आयोजित किया था. यह एक सरकारी आयोजन था. इसमें हिंदी के वरिष्ठ कवियों एवं लेखकों की भागीदारी रही. इसमें विनोद कुमार शुक्ल, नरेश सक्सेना, अशोक वाजपेयी, मैत्रेयी पुष्पा से लेकर हृषिकेश...

खाक हुआ दिल जलते-जलते

खाक हुआ दिल जलते-जलते

तुम मुझे हारमोनियम, तबला और लोता दे दो, तो मैं यादगार गीत तैयार कर सकता हूं. मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन अपने बंगाली उच्चारण की वजह से जीवनपर्यंत लता मंगेशकर को लोता ही कहते रहे. लता मंगेशकर को सचिन देव...

एक अशुद्ध बेवकूफ

 हरिशंकर परसाई उन ख्याति प्राप्त साहित्यकारों में से एक हैं, जिन्होंने लेखन का अपना एक अलग अंदाज़ ईजाद किया. वर्ष 1922 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में जन्मे परसाई ने कुछ दिनों तक अध्यापन कार्य करने के बाद स्वतंत्र...

नियमित हो तो बात बने

नियमित हो तो बात बने

मैने चौथी दुनिया के अपने इस स्तंभ में कई बार हिंदी में निकल रही साहित्यिक पत्रिकाओं के बारे में विस्तार से लिखा है. पाठकों ने पिछले अंक में पढ़ा होगा कि हिंदी साहित्य में साहित्यिक पत्रिकाओं को निकालने के पीछे...

अंतर्द्वंद्व की सहज अभिव्यक्ति

अंतर्द्वंद्व की सहज अभिव्यक्ति

कोमलता की पहली अनुगूंज किसी ने सुनी थी जो निरंतर अमरबेल की तरह फैलती रही. समाज, व्यवस्था, संस्कृति, परंपरा, स्नेह, सौहार्द, भाईचारा, रिश्ते-नाते के ताने-बाने सहित देश-दुनिया की समस्त सघन अनुभूतियां बड़ी बारीकी और चतुराई से कविता के पंक्तियों में...

साल 2013 का साहित्यिक लेखा-जोखा

साल 2013 का साहित्यिक लेखा-जोखा

साल 2013 तमाम साहित्यिकगतिविधियों से भरा हुआ रहा. बिल्कुल प्रारम्भ में ही जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल के दौरान आशीष नन्दी महज़ एक बयान के कारण भयंकर विवादों में उलझ गए और तमाम ऐसे लेखक उस कार्यक्रम में वैसा कार्यनिष्पादन नहीं कर...

अ़खबारों से ग़ायब होता साहित्य

अ़खबारों से ग़ायब होता साहित्य

साहित्य समाज का आईना होता है. जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है. साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे खुद नहीं...

धूप भी चांदनी-सी लगती है

धूप भी चांदनी-सी लगती है

आधुनिक उर्दू शायरी के क्रांतिकारी शायर अली सरदार जा़फरी ने अपनी क़लम के ज़रिये समाज को बदलने की कोशिश की. उनका कहना था कि शायर न तो कुल्हा़डी की तरह पे़ड काट सकता है और न इंसानी हाथों की तरह...

बच्चों के लिए एक अच्छी किताब

बच्चों के लिए एक अच्छी किताब

बचपन, उम्र का सबसे प्यारा दौर होता है. यह अलग बात है कि जब हम छोटे होते हैं तो ब़डा होना चाहते हैं, क्योंकि कई बार स्कूल, प़ढाई और रोकटोक से परेशान हो जाते हैं. हम कहते हैं कि अगर...

समकालीन गीतिकाव्य पर बेहतरीन शोध ग्रंथ

अनंग प्रकाशन द्वारा प्रकाशित समकालीन गीतिकाव्य : संवेदना और शिल्प में लेखक डॉ. रामस्नेही लाल शर्मा यायावर ने हिंदी काव्य में 70 के दशक के बाद हुए संवेदनात्मक और शैल्पिक परिवर्तनों की आहट को पहचानने की कोशिश की है. नवगीतकारों...

सरल शब्दों में जीवन की अभिव्यक्ति

सरल शब्दों में जीवन की अभिव्यक्ति

हाल में आरोही प्रकाशन ने रेणु हुसैन की कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित किए हैं. पहला कविता संग्रह है पानी-प्यार और दूसरे कविता संग्रह का नाम है जैसे. अंग्रेज़ी की वरिष्ठ अध्यापिका रेणु हुसैन स्कूल के व़क्त से ही कविताएं...

रिश्तों की गर्माहट का संग्रह

रिश्तों की गर्माहट का संग्रह

चौथी दुनिया में लगभग तीन साल से ज़्यादा समय से लिख रहे अपने स्तंभ में कविता और कविता संग्रह पर बहुत कम लिखा. साहित्य से जुड़े कई लोगों ने शिकायती लहज़े में इस बात के लिए मुझे उलाहना भी दिया....

तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में

तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में

उर्दू और फारसी शायरी के चमन का यह दीदावर यानी मोहम्मद अल्लामा इक़बाल 9 नवंबर, 1877 को पाकिस्तान के स्यालकोट में पैदा हुआ. उनके पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे, लेकिन क़रीब तीन सौ साल पहले उन्होंने इस्लाम क़ुबूल कर लिया था

करूं न याद, मगर किस तरह भुलाऊं उसे

करूं न याद, मगर किस तरह भुलाऊं उसे

अहमद फराज़ आधुनिक दौर के उम्दा शायरों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 14 जनवरी, 1931 को पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत के कोहाट में हुआ था. उनका असली नाम सैयद अहमद शाह था. उन्होंने पेशावर विश्वविद्यालय से उर्दू और...

जाने कब तक तेरी तस्वीर निगाहों में रही

जाने कब तक तेरी तस्वीर निगाहों में रही

पाकिस्तान की मशहूर शायरा परवीन शाकिर के कलाम की खुशबू ने न केवल पाकिस्तान, बल्कि हिंदुस्तान की अदबी फिज़ा को भी महका दिया. वह अपना पहला काव्य संग्रह आने से पहले ही इतनी मशहूर हो चुकी थीं कि जहां भी...

मूल्यांकन में आलस क्यों

मूल्यांकन में आलस क्यों

कौन जानता था कि सिमरिया घाट के बालू की रेत पर खेलने वाला बालक एक दिन अपनी तर्जनी उठाकर कह सकेगा- लोहे के पेड़ हरे होंगे तू गान प्रेम का गाता चल, नम होगी यह मिट्टी ज़रूर तू आंसू के...

जहां चाह, वहां राह

एक अच्छी कोशिश हमेशा प्रशंसनीय होती है, लेकिन जब ऐसी कोई कोशिश नए और संसाधनों का अभाव झेलने वाले लोग करते हैं तो वे दो-चार अच्छे शब्दों और शाबाशी के हक़दार ख़ुद-बख़ुद हो जाते हैं. त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका समसामयिक सृजन...

रहें न रहें हम, महका करेंगे…

रहें न रहें हम, महका करेंगे…

मशहूर शायर एवं गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का असली नाम असरारुल हसन खान था. उनका जन्म एक अक्टूबर, 1919 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद में हुआ था. उनके पिता पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक थे. मजरूह ने दरसे-निज़ामी का कोर्स किया....

साहित्य जगत में तकनीकी क्रांति

साहित्य जगत में तकनीकी क्रांति

वर्तमान समय तकनीक का युग हो गया है. इससे कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रह गया है. भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में दुनिया बहुत तेज़ी से सिकुड़ती और नज़दीक आती जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में इंटरनेट एक ऐसा माध्यम हैं,...

आम आदमी के दुःख-दर्द की किताब

आम आदमी के दुःख-दर्द की किताब

कोई माने या न माने, लेकिन सच यही है कि कविता की कोई शास्त्रीय परिभाषा नहीं होती. वह हर पंक्ति कविता है, जो तरीक़े से आम आदमी के दु:ख-दर्द की बात करती है, घर-आंगन की बात करती है, समाज के...

पीछे हूं कहां आपसे रफ्तार में देखें

पीछे हूं कहां आपसे रफ्तार में देखें

पाकिस्तान की मशहूर शायरा फ़ातिमा हसन एक अखिल भारतीय मुशायरे में हिस्सा लेने के लिए पिछले दिनों भारत में थीं. इस दौरान चौथी दुनिया (उर्दू) की संपादक वसीम राशिद ने उनसे एक लंबी बातचीत की. पेश हैं मुख्य अंश:

डॉ. वैद्यनाथ शर्माः पर्दे के पीछे हैं नंगे, बाहर रूप सजाते हैं

डॉ. वैद्यनाथ शर्माः पर्दे के पीछे हैं नंगे, बाहर रूप सजाते हैं

संघर्ष संकुल जीवन के गलियारे से गुज़र कर लक्ष्य के विराट प्रांगण तक एक आम आदमी किस तरह पहुंचता है, यही साबित किया डॉ. वैद्यनाथ शर्मा ने. बहुआयामी रचनाधर्मिता और उदात्त व्यक्तित्व के धनी डॉ. शर्मा उच्च कोटि के शिक्षाविद्,...

नारायण सुर्वे: आम जनता का कवि

नारायण सुर्वे: आम जनता का कवि

ऐसा गामी ब्रह्म, माझे विद्यापीठ एवं जाठीरबामा जैसे कविता संकलनों के रचयिता एवं प्रसिद्ध मराठी विद्वान पद्मश्री नारायण सुर्वे नहीं रहे. पिछले दिनों उनका निधन हो गया, वह 83 साल के थे. नारायण अनाथ थे, बचपन में उनका पालन पोषण...

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