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मल्टीप्लेक्स में ले जा सकते हैं ये चीज़ें, कोई रोके तो मिलेगा मोटा हर्जाना

मल्टीप्लेक्स में ले जा सकते हैं ये चीज़ें, कोई रोके तो मिलेगा मोटा हर्जाना

देश में सैकड़ों मल्टीप्लेक्स हैं जिनमें हर रोज़ कई सारे शोज़ दिखाए जाते हैं. आपमें से भी कई सारे लोग हफ्ते दो हफ्ते में फिल्में देखने के लिए मल्टीप्लेक्स में जाते होंगे लेकिन आपको मल्टीप्लेक्स के बारे में कुछ बातें...

जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्याग्रह मार्च ग्वालियर से 3 अक्टूबर को शुरू हुआ. योजना के मुताबिक़, क़रीब एक लाख किसान ग्वालियर से चलकर दिल्ली पहुंचने वाले थे. इस मार्च में शामिल होने वालों में सभी जाति-संप्रदाय के अदिवासी, भूमिहीन एवं ग़रीब किसान थे....

अधिकारों से वंचित हैं मुस्लिम महिलाएं

अधिकारों से वंचित हैं मुस्लिम महिलाएं

दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी महिलाओं की है. इस लिहाज़ से महिलाओं को तमाम क्षेत्रों में बराबरी का हक़ मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. कमोबेश दुनिया भर में महिलाओं को आज भी दोयम दर्जे पर रखा जाता है. अमूमन...

भारतीय जल नीति के खतरे

भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक...

पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की

पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की

पत्रकारिता की संवैधानिक मान्यता नहीं है, लेकिन हमारे देश के लोग पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर संसद, नौकरशाही और न्यायपालिका से जुड़े लोगों से ज़्यादा भरोसा करते हैं. हमारे देश के लोग आज भी अ़खबारों और टेलीविजन की खबरों पर...

प्रथम अपील कब और कैसे करें

प्रथम अपील कब और कैसे करें

आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है. ऐसी स्थिति में अपील एवं शिकायत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता.

महिला पत्रकार भारतीय मीडिया से ग़ायब हैं

महिला पत्रकार भारतीय मीडिया से ग़ायब हैं

पिछले कुछ वर्षों ख़ासकर नब्बे के दशक के बाद हिंदुस्तान का एक तबक़ा यह मानने लगा कि देश की आत्मा अब दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में ही बसने लगी है. उनका मानना है कि महानगरों में महिलाओं को पुरुषों...

पाठशाला में कोटा कितना कारगर होगा

पाठशाला में कोटा कितना कारगर होगा

देश में छह वर्ष से चौदह साल की आयु के हर बच्चे को अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार देने वाले क़ानून राइट टू एजुकेशन को उच्चतम न्यायालय ने अपनी मंज़ूरी दे दी है. न्यायादेश के मुताबिक़, अब देश के...

महिलाओं के अधिकार और क़ानून

महिलाओं के अधिकार और क़ानून

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है, चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का. मगर इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव...

स्कूलों से हिसाब मांगें

स्कूलों से हिसाब मांगें

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया. इस क़ानून ने आम आदमी को...

आरक्षण के नाम पर मुसलमानों से धोखा

देश के संविधान में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी के अधिकार दिए जा सकें, उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह तरक्की के अवसर मिल सकें, क्योंकि इतिहास...

यूआईडीः नागरिकों के मूल अधिकारों के साथ खिलवाड़

जब लोकपाल बिल को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हज़ारे का एक दिवसीय अनशन शुरू हुआ तो उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को जनलोकपाल बिल पर बहस करने की दावत दी, लेकिन सांसदों ने यह कहकर हंगामा खड़ा...

प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

प्रेस काउंसिल के नए चेयरमैन ने कुछ ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है, जिसकी वजह से मीडिया में अ़फरा-त़फरी का माहौल बन गया. इसके पीछे प्रेस काउंसिल का मक़सद स़िर्फ इतना था कि वह प्रेस के क्रिया-कलापों व मानकों पर...

सूचना आयोग ज़रूर जाएं

सूचना आयोग ज़रूर जाएं

आरटीआई अधिनियम के तहत सभी नागरिकों को सूचना पाने का अधिकार है, लेकिन आम तौर पर देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारी सूचना न देने के हज़ार बहाने बनाते हैं. ऐसे में आ़खिरी रास्ता बचता है सूचना आयोग का.

चौंसठ साल बनाम छह साल

चौंसठ साल बनाम छह साल

अक्टूबर, 2005. इसी दिन सूचना का अधिकार क़ानून लागू हुआ था. क़ानून तो बन गया, लेकिन इस क़ानून को लेकर जनता और सरकार में तू डाल-डाल, मैं पात-पात का खेल जो शुरू हुआ, वह अब तक चल रहा है.

बच्चों ने किया कमाल

बच्चों ने किया कमाल

दिल्ली के पब्लिक स्कूलों में गरीब बच्चों का दाखिला टेढ़ी खीर है, लेकिन सरकारी स्कूल भी इस मामले में कम नहीं हैं. दिल्ली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली छात्रवृत्तियां भी कई बार जरूरतमंद छात्र-छात्राओं तक नहीं पहुंच...

आरटीआई का दुश्मन कौन है

आरटीआई का दुश्मन कौन है

केंद्र और राज्यों के लगभग तमाम सूचना आयुक्त सूचना न देने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने से बचते रहे हैं. यहां तक कि जनता की मांग पर आयुक्त बनाए गए शैलेष गांधी भी अपनी श्रेष्ठता एक दिन में अधिक से...

बीपीएल चयन प्रक्रिया की जांच और आरटीआई

बीपीएल चयन प्रक्रिया की जांच और आरटीआई

जिस देश की 37 फीसदी से ज़्यादा आबादी ग़रीब हो, वहां यह ज़रूरी हो जाता है कि ग़रीबी से जुड़ी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए, लेकिन व्यवहार में अब तक यही देखने को मिला है कि ग़रीबों के...

सरकारी स्कूलों का लें हिसाब

सरकारी स्कूलों का लें हिसाब

शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत छह साल से लेकर 14 साल तक के बच्चों के लिए शिक्षा उनका मौलिक अधिकार होगा. इस क़ानून से उन करोड़ों बच्चों को फायदा मिलेगा, जो स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. लेकिन सवाल...

समस्याएं अनेक समाधान एक

समस्याएं अनेक समाधान एक

आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है,...

टिकैत नेता नहीं, नायक थे

टिकैत नेता नहीं, नायक थे

किसान बदला नहीं लेता, वह सारे ज़ुल्म सह जाता है. वह तो स़िर्फ जीने का अधिकार भर चाहता है. पुलिस ने जो ज़ुल्म किया है, उससे किसानों का हौसला और बढ़ा है. किसान जानता है कि राजीव गांधी ने दुश्मन...

संसदीय विशेषाधिकार में फंसा आरटीआई

संसदीय विशेषाधिकार में फंसा आरटीआई

सूचना क़ानून का इस्तेमाल करने वाले आवेदकों ने तीसरे पक्ष और न्यायालय की अवमानना जैसे शब्दों का कई बार सामना किया होगा, क्योंकि इन्हीं शब्दों की आड़ में कई बार सूचना देने से मना कर दिया जाता है. कभी-कभी सूचना...

तीसरा पक्ष क्या है

तीसरा पक्ष क्या है

कई बार जब आप किसी सरकारी विभाग में आरटीआई आवेदन देते हैं तो जवाब में आपको बताया जाता है कि अमुक सूचना तीसरे पक्ष से जुड़ी है, इसलिए आपको नहीं दी जा सकती या मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए...

अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन

अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन

उच्चतम न्यायालय की ग्यारह सदस्य खंडपीठ ने टी एम ए पाई एवं पी ए ईनामदार की याचिकाओं पर संविधान की धारा 30 (1) के तहत निर्णय देते हुए अल्पसंख्यकों को पांच अधिकार दिए, जिसमें शिक्षण संस्थाओं में नियुक्ति, शुल्क निर्धारण,...

सरकारी लोकपाल बनाम जन लोकपाल

सरकारी लोकपाल बनाम जन लोकपाल

आखिर क्या है जन लोकपाल? क्यों सरकार जन लोकपाल को लेकर परेशान है? असल में जन लोकपाल बिल एक ऐसा क़ानून है, जो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के लिए किसी ताबूत से कम नहीं साबित होगा. पिछले 42 सालों में यह...

भ्रष्टाचार के खिला़फ जनता को आगे आना होगा

हिंदुस्तान सबसे बड़ा प्रजातंत्र होने के बावजूद दुनिया का 72 वां सबसे भ्रष्ट देश है. दुनिया में 86 ऐसे देश हैं, जहां भारत से कम भ्रष्टाचार है. आज़ादी के बाद से ही हम भ्रष्टाचार के साथ जूझ रहे हैं. भ्रष्टाचार...

विधानसभा चुनाव और मुसलमानों का सियासी रूझान

विधानसभा चुनाव और मुसलमानों का सियासी रूझान

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, मुसलमान वहां रिवायती तौर पर अभी तक सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे को ही वोट देते आए हैं. कांग्रेस के मुक़ाबले मुसलमानों को वाम मोर्चा सरकार में अपने अधिकारों की अधिक...

सच के सिपाही को धमकी

सच के सिपाही को धमकी

सवाल पूछना जनता का अधिकार है और यह अधिकार संविधान देता है, लेकिन सवाल पूछना कभी-कभी कितना तकलीफदेह हो सकता है, यह पिछले साल हुईं आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्याओं से साफ पता चलता है. कार्यकर्ताओं की हत्या, परेशान करने और...

एकता परिषदः इस चेतावनी को सिर्फ रैली न समझें

एकता परिषदः इस चेतावनी को सिर्फ रैली न समझें

वर्ष 2007 में जब 25 हज़ार लोग ग्वालियर से पैदल चलकर दिल्ली आए, तब तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री ने इन्हें आश्वासन दिया. 2009 में जब एक बार फिर ये लोग दिल्ली आए, तब भी इन्हें आश्वासन ही मिला. हर बार...

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