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Tag: Tribal

मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की...

भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास व पुनर्स्‍थापन अधिनियम (संशोधन) 2011 : नई हांडी में पुरानी खिचड़ी

भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास व पुनर्स्‍थापन अधिनियम (संशोधन) 2011 : नई हांडी में पुरानी खिचड़ी

नए भूमि अधिग्रहण क़ानून को लेकर देश भर की निगाहें संसद और केंद्र सरकार पर टिकी हुई हैं. जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलित कई राज्यों में सैकड़ों ग़रीब किसानों एवं आदिवासियों को पुलिस की गोलियों का शिकार होना...

महाराष्ट्र : तीन लाख टन धान सड़ने की कगार पर

महाराष्ट्र : तीन लाख टन धान सड़ने की कगार पर

सरकार किसानों से बड़ी मात्रा में धान की खरीद तो करती है, लेकिन उसे व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जाता. नतीजतन, वह खुले मैदान में पड़े-पड़े सड़ जाता है.

सरकार आदिवासियों की सुध कब लेगी

सरकार आदिवासियों की सुध कब लेगी

छत्तीसगढ़ को क़ुदरत ने अपार संपदा से नवाज़ा है, जिसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो यह क्षेत्र के विकास में का़फी सहायक सिद्ध हो सकता है. इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नाममात्र विकास हो पा रहा है.

कुंभलगढ नेशनल पार्क : फ़िक्र जानवरों की, आदिवासियों की नहीं

कुंभलगढ नेशनल पार्क : फ़िक्र जानवरों की, आदिवासियों की नहीं

राजस्थान में केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने हज़ारों लोगों को विस्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है. इस बार विस्थापन का यह खेल किसी उद्योगपति को काऱखाना लगाने के नाम पर ज़मीन मुहैया कराने के लिए नहीं खेला...

अनुराधा बनीं एएस

अनुराधा बनीं एएस

1981 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा गुप्ता को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. वह इसी मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रही थीं.

ये मुख़बिरों की बस्ती है

देश में आज भी धर्म और जाति के आधार पर बस्ती, पारा और मोहल्लों का बसना और इनकी पहचान न स़िर्फ मौजूद है, बल्कि स्वीकार्य भी है. परंतु इसी देश में मु़खबिरों की एक बस्ती भी है, यह सुनकर कोई...

वनों में प्रकाश की किरण

भारत में वनों पर निर्भर 250 मिलियन लोग दमनकारी साम्राज्यवादी वन संबंधी क़ानूनों के जारी रहने के कारण ऐतिहासिक दृष्टि से भारी अन्याय के शिकार होते रहे हैं और ये लोग देश में सबसे अधिक ग़रीब भी हैं. वन्य समुदायों...

वनाधिकार कानून और महिलाएं

वनाधिकार कानून और महिलाएं

देश को आज़ादी मिलने के साठ साल बाद 2006 में वनाश्रित समुदाय के अधिकारों को मान्यता देने के लिए एक क़ानून पारित किया गया, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत निवासी (वनाधिकारों को मान्यता) क़ानून. यह क़ानून बेहद है. यह केवल...

बांस बना रोजगार का साधन

बांस बना रोजगार का साधन

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर यह सा़फ कर दिया कि बांस पेड़ नहीं, बल्कि घास की श्रेणी में आते हैं. अत: इन्हें काटने के लिए वन विभाग से...

आदिवासी अल्पायु होते हैं

आदिवासी अल्पायु होते हैं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के कई देशों में रहने वाली आदिम प्रजातियों के लोगों की आयु शेष जनसंख्या से कहीं कम होती है यानी वे दूसरों की तुलना में कम जीते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने...

किसान आंदोलन चौथी दुनिया और सुप्रीम कोर्ट

किसान आंदोलन चौथी दुनिया और सुप्रीम कोर्ट

वर्तमान हालात में जन सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का स्वरूप क्या हो सकता है? इसकी एक मिसाल चौथी दुनिया की उन रिपोर्टों में देखने को मिलती है, जो देश भर में चल रही जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई से...

कोस्का: खुद खोज ली जीवन की राह

कोस्का: खुद खोज ली जीवन की राह

देश भर के जंगली क्षेत्रों में स्व:शासन और वर्चस्व के सवाल पर वनवासियों और वन विभाग में छिड़ी जंग के बीच उड़ीसा में एक ऐसा गांव भी है, जिसने अपने हज़ारों हेक्टेयर जंगल को आबाद करके न स़िर्फ पर्यावरण और...

नक्सलियों की रोकने की कवायद

नक्सलियों की रोकने की कवायद

अभी कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार की तऱफ से वनवासियों एवं आदिवासियों के कल्याण और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए कई सकारात्मक क़दम उठाए गए हैं तथा अनेक पहल के संकेत भी मिले हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों से...

वे आजादी के बावजूद आजाद नहीं थे

वे आजादी के बावजूद आजाद नहीं थे

हिंदुस्तान की एक बड़ी आबादी के बीच एक तबक़ा ऐसा भी है, जिसे आज़ादी के अरसे बाद भी मुजरिमों की तरह पुलिस थानों में हाज़िरी लगानी पड़ती थी. आ़खिरकार 31 अगस्त, 1952 को उसे इससे निजात तो मिल गई, लेकिन...

आदिवासियों की उपेक्षा कब तक?

आदिवासियों की उपेक्षा कब तक?

आज देश का आदिवासी समुदाय राजनीति के केंद्र में आ गया है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि उसने देश की सरकार के ख़िला़फ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है. आदिवासी एक ऐसे सामजिक...

सीएनटी एक्‍ट विवाद थमेगा नहीं

सीएनटी एक्‍ट विवाद थमेगा नहीं

सीएनटी एक्ट को लेकर पिछले दिनों उठा विवाद फिलहाल थम गया है, लेकिन राख के नीचे चिंगारी दबी है. यह चिंगारी कभी भी भड़क सकती है. पिछले दिनों सीएनटी एक्ट के एक प्रावधान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया...

अपने बूते जिंदा हैं आदिवासी

अपने बूते जिंदा हैं आदिवासी

कैमूर पर्वत श्रृखंला भारत की प्राचीनतम पर्वतमालाओं में से है, जहां पर सोन, घाघरा, कर्मनाशा आदि नदियां बहती हैं. वनों से आच्छादित इस क्षेत्र में आदिवासियों का वास रहा है. लेकिन मुगलों व अंग्रेजों के दख़ल के बाद से इस...

जीने का अधिकार अभियानः जन जागरण के नए प्रयोग की दस्तक

जीने का अधिकार अभियानः जन जागरण के नए प्रयोग की दस्तक

अपने हितों और अधिकारों के लिए आदिवासियों को जगाने और जुटाने का यह अनूठा सामाजिक प्रयोग है. नाम है जीने का अधिकार अभियान, जो मध्य प्रदेश के जबलपुर, कटनी एवं मंडला ज़िलों के ढाई दर्जन से अधिक आदिवासी गांवों में...

सोनभद्रः फर्जी मुठभेड़- आदिवासी और दलित निशाने पर

सोनभद्रः फर्जी मुठभेड़- आदिवासी और दलित निशाने पर

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में 6 वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फर्ज़ी करार देते हुए, उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया. सोनभद्र की अदालत द्वारा...

यूनिक आइडेंटिफिकेशन: आधार पर आशंकाएं

यूनिक आइडेंटिफिकेशन: आधार पर आशंकाएं

यूपीए सरकार ने देश के सभी निवासियों को एक विशिष्ट पहचान नंबर यानी यूनिक आइडेंटिफिकेशन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हाल में पश्चिमी महाराष्ट्र के आदिवासी इलाक़े तेंभली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 आदिवासियों को 12 अंकों...

आदिवासी आज भी गुलाम है

आदिवासी आज भी गुलाम है

आज देश के अधिकांश जंगलक्षेत्र एक ऐसी हिंसा की आग से धधक रहे हैं, जिसकी आंच को कहीं न कहीं पूरा देश महसूस कर रहा है. इस आग का कारण इन क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का तेज होना है. देश...

उदयपुर सांप्रदायिक दंगाः राजस्‍थान पुलिस ने गुजरात दोहराया

उदयपुर सांप्रदायिक दंगाः राजस्‍थान पुलिस ने गुजरात दोहराया

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राजस्थान के उदयपुर ज़िले के सारदा नामक क़स्बे में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच रिपोर्ट मेरे सामने है. यह हिंसा एक मीणा आदिवासी की हत्या के बाद भड़की. यह हत्या विशुद्ध आपराधिक थी....

कला का राजनीति से कोई नाता नहीं

कला का राजनीति से कोई नाता नहीं

यदि आज के हालात में बस्तर जाने के नाम पर कुछ लोगों को सिहरन होने लगे तो ग़लत नहीं होगा, किंतु व्यापक संदर्भ में ऐसा नहीं है. नक्सली हिंसा के चलते इस क्षेत्र के बारे में दुनिया में एक दूसरी...

प्राकृतिक रेशों का ताना बाना

प्राकृतिक रेशों का ताना बाना

उत्तर में जबलपुर और दक्षिण में गोंदिया एवं बालाघाट के बीच स्थित है एशिया का सबसे बड़ा नैरोगेज स्टेशन नैनपुर. उत्तर भारत के सूखाग्रस्त इलाक़े से दूर झिरझिराती बारिश की नन्हीं बूंदें नर्मदांचल की भूमि को तर कर रही थीं....

यह विद्रोह की आहट है

यह विद्रोह की आहट है

किसी इंसान की तबीयत कितनी खराब है, यह जानने के लिए डॉक्टर थर्मामीटर लगाता है, आला लगाता है, कई तरह के टेस्ट करता है. शरीर का रक्तचाप, तापमान आदि जानकर वह इस नतीजे पर पहुंचता है कि उसकी हालत कैसी...

दम तोड़ता लोकतंत्र

दम तोड़ता लोकतंत्र

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत के सामान्य निर्वाचन-2010 का शंखनाद हो चुका है. ये चुनाव 15 सितंबर से लेकर 31 अक्टूबर के बीच होंगे. उधर सूबे के आदिवासियों में केंद्र और राज्य सरकार के प्रति...

वनवासियों का त्रासद विस्‍थापनः कोई कुनो की सुनो

वनवासियों का त्रासद विस्‍थापनः कोई कुनो की सुनो

उत्तर पश्चिम मध्य प्रदेश के शिवपुरी ज़िले में है कुनो पालपुर अभयारण्य. यह ग्वालियर से लगभग 120 किमी दूर है. यहां एक अभयारण्य बनाने और उसमें गुजरात के गीर जंगल के पांच से आठ एशियाटिक शेरों को रखने के लिए...

गोंडवाना राज्य की मांग फिर बुलंद

गोंडवाना राज्य की मांग फिर बुलंद

पृथक गोंडवाना राज्य के गठन की मांग एक बार फिर बुलंद हुई है. हाल ही भोपाल में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संस्थापक, अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की एक सभा में इस मांग को उठाते...

सार-संक्षेपः गृहयुद्ध का रूप है नक्सलवाद

सार-संक्षेपः गृहयुद्ध का रूप है नक्सलवाद

पुरी पीठ के शंकराचार्य जगतगुरू निश्चलानंद सरस्वती देश में बढ़ते नक्सलवादी प्रभाव और आतंक को भारत में गृहयुद्ध का एक रूप मानते हैं. इनका कहना है कि नेपाल की तरह ही हिन्दू बहुल भारत राष्ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा...

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